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Raipur : निःशुल्क ब्याज के साथ लाख फसल ऋण उपलब्ध कराने राज्य सरकार का अहम् फैसला

रायपुर, 19 नवम्बर | मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश के अनुरूप छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा किसानों को लाख की खेती के लिए प्रोत्साहित करने और उनकी आय में वृद्धि हेतु विशेष पहल की जा रही है। इसके परिपालन में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा बीहन लाख आपूर्ति तथा बीहन लाख विक्रय और लाख फसल ऋण की उपलब्धता के लिए मदद सहित आवश्यक व्यवस्था की गई है। राज्य में वर्तमान में 4 हजार टन लाख का उत्पादन होता है, जिसका अनुमानित मूल्य राशि 100 करोड़ रूपए है। राज्य में लाख उत्पादन को 10 हजार टन तक बढ़ाते हुए 250 करोड़ रूपए की आय कृषकों को देने का लक्ष्य है।

राज्य में बीहन लाख की कमी को दूर करने हेतु कृषकों के पास उपलब्ध बीहन लाख को उचित मूल्य पर क्रय करने के लिए क्रय दर का निर्धारण किया गया है। इसके तहत कुसुमी बीहन लाख (बेर वृक्ष से प्राप्त) मूल्य सीमाएं के लिए कृषकों को देय क्रय दर 550 रूपए प्रति किलो ग्राम तथा रंगीनी बीहन लाख (पलाश वृक्ष से प्राप्त) के लिए कृषकों को देय क्रय दर 275 रूपए प्रति किलोग्राम निर्धारित है। इसी तरह कृषकों को बीहन लाख उपलब्ध कराने हेतु विक्रय दर का भी निर्धारण किया गया है। इसके तहत कुसुमी बीहन लाख (बेर वृक्ष से प्राप्त ) के लिए कृषकों को देय विक्रय दर 640 रूपए प्रति किलोग्राम और रंगीनी बीहन लाख (पलाश वृक्ष से प्राप्त) के लिए कृषकों को देय विक्रय दर 375 रूपए प्रति किलोग्राम निर्धारित है।

राज्य सरकार द्वारा किसानों को लाख की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए जिला सहकारी बैंक के माध्यम से लाख फसल ऋण निःशुल्क ब्याज के साथ प्रदाय करने हेतु व्यवस्था की गई है। इसके तहत लाख पालन करने हेतु पोषक वृक्ष कुसुम पर 5 हजार रूपए, बेर पर 900 रूपए तथा पलाश पर 500 रूपए प्रति वृक्ष ऋण सीमा निर्धारित है। लाख पालन को वैज्ञानिक पद्धति से करने हेतु राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा मूल्य सीमाएं कांकेर में प्रशिक्षण केन्द्र खोला गया है। इस केन्द्र में 03 दिवसीय संस्थागत प्रशिक्षण के साथ लाख उत्पादन क्लस्टर में ऑनफार्म प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

राज्य में योजना के सफल क्रियान्वयन और लाख उत्पादन में वृद्धि करने के लिए 20 जिला यूनियनों में 03 से 05 प्राथमिक समिति क्षेत्र को जोड़ते हुए लाख उत्पादन क्लस्टर का गठन भी किया गया है। इसके तहत प्रत्येक लाख उत्पादन क्लस्टर में सर्वेक्षण कर कृषकवार बीहन लाख की मांग की जानकारी ली जा रही है। इनमें कृषकों को संघ द्वारा निर्धारित मूल्य पर बीहन लाख प्रदाय करने हेतु आवश्यक कुल राशि को अग्रिम रूप से जिला यूनियन खाते में जमा कराना होगा। इसके तहत कुसुमी बीहन लाख के लिए कृषकों से प्राप्त मांग के अनुरूप राशि जमा किए जाने हेतु 15 दिसंबर तक समय-सीमा निर्धारित है।

छत्तीसगढ़ सरकार का अहम् फैसला : किसानों को बिना ब्याज के लाख की खेती के लिए मिलेगा ऋण

राज एक्सप्रेस

रायपुर, छत्तीसगढ़। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश के अनुरूप छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा किसानों को लाख की खेती के लिए प्रोत्साहित करने और उनकी आय में वृद्धि हेतु विशेष पहल की जा रही है। इसके परिपालन में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा बीहन लाख आपूर्ति तथा बीहन लाख विक्रय और लाख फसल ऋण की उपलब्धता के लिए मदद सहित आवश्यक व्यवस्था की गई है। राज्य में वर्तमान में 4 हजार टन लाख का उत्पादन होता है, जिसका अनुमानित मूल्य राशि 100 करोड़ रूपए है। राज्य में लाख उत्पादन को 10 हजार टन तक बढ़ाते हुए 250 करोड़ रूपए की आय कृषकों को देने का लक्ष्य है।

राज्य में बीहन लाख की कमी को दूर करने हेतु कृषकों के पास उपलब्ध बीहन लाख को उचित मूल्य पर मूल्य सीमाएं क्रय करने के लिए क्रय दर का निर्धारण किया गया है। इसके तहत कुसुमी बीहन लाख (बेर वृक्ष से प्राप्त) के लिए कृषकों को देय क्रय दर 550 रूपए प्रति किलो ग्राम तथा रंगीनी बीहन लाख (पलाश वृक्ष से प्राप्त) के लिए कृषकों को देय क्रय दर 275 रूपए प्रति किलोग्राम निर्धारित है। इसी तरह कृषकों को बीहन लाख उपलब्ध कराने हेतु विक्रय दर का भी निर्धारण किया गया है। इसके तहत कुसुमी बीहन लाख (बेर वृक्ष से प्राप्त ) के लिए कृषकों को देय विक्रय दर 640 रूपए प्रति किलोग्राम और रंगीनी बीहन लाख (पलाश वृक्ष से प्राप्त) के लिए कृषकों को देय विक्रय दर 375 रूपए प्रति किलोग्राम निर्धारित है।

राज्य सरकार द्वारा किसानों को लाख की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए जिला सहकारी बैंक के माध्यम से लाख फसल ऋण निःशुल्क ब्याज के साथ प्रदाय करने हेतु व्यवस्था की गई है। इसके तहत लाख पालन करने हेतु पोषक वृक्ष कुसुम पर 5 हजार रूपए, बेर पर 900 रूपए तथा पलाश पर 500 रूपए प्रति वृक्ष ऋण सीमा निर्धारित है। लाख पालन को वैज्ञानिक पद्धति से करने हेतु राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा कांकेर में प्रशिक्षण केन्द्र खोला गया है। इस केन्द्र में 03 दिवसीय संस्थागत प्रशिक्षण के साथ लाख उत्पादन क्लस्टर में ऑनफार्म प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

राज्य में योजना के सफल क्रियान्वयन और लाख उत्पादन में वृद्धि करने के लिए 20 जिला यूनियनों में 03 से 05 प्राथमिक समिति क्षेत्र को जोड़ते हुए लाख उत्पादन क्लस्टर का गठन भी किया गया है। इसके तहत प्रत्येक लाख उत्पादन क्लस्टर में सर्वेक्षण कर कृषकवार बीहन लाख की मांग की जानकारी ली जा रही है। इनमें कृषकों को संघ द्वारा निर्धारित मूल्य पर बीहन लाख प्रदाय करने हेतु आवश्यक कुल राशि को अग्रिम रूप से जिला यूनियन खाते में जमा कराना होगा। इसके तहत कुसुमी बीहन लाख के लिए कृषकों से प्राप्त मांग के अनुरूप राशि जमा किए जाने हेतु 15 दिसंबर तक समय-सीमा निर्धारित है।

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संयुक्त किसान मोर्चा 19 नवंबर को मनाएगा फतह दिवस, केंद्र पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने केंद्र सरकार पर विश्वासघात करने का आरोप लगाया है. एसकेएम ने कहा कि किसानों की लंबित मांगों को लेकर केन्द्र सरकार ने विश्वासघात किया है. मोर्चा ने कहा कि 26 नवंबर को किसान राजभवनों की ओर मार्च निकालेंगे.

Samyukta Kisan Morcha

संयुक्त किसान मोर्चा ने 19 नवंबर को फतह दिवस मनाने का ऐलान किया है. मोर्चा का कहना है कि इसी दिन केन्द्र सरकार ने उनके कठिन आंदोलन के बाद इसी दिन तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने का आदेश दिया था. ऐसे में इस दिन को फतह दिवस या विजय दिवस के रूप में मनाने का किसानों ने ऐलान किया है. किसान नेता दर्शन पाल ने आज यानी गुरुवार को कहा कि सभी राजनीतिक दलों के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के कार्यालयों तक एक से 11 दिसंबर तक मार्च आयोजित किया जाएगा.

26 नवंबर से राजभवन मार्च का आयोजन: वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने केंद्र सरकार पर विश्वासघात करने का आरोप लगाया है. एसकेएम ने कहा कि किसानों की लंबित मांगों को लेकर केन्द्र सरकार ने विश्वासघात किया है. मोर्चा ने कहा कि 26 नवंबर को किसान राजभवनों की ओर मार्च निकालेंगे.

अपने वादे भूल गई है केंद्र सरकार: एसकेएम का आरोप है कि केंद्र सरकार किसानों के आंदोलन खत्म करने के एवज में अपने किये वादे भूल गई है. एसकेएम ने कहा कि केंद्र सरकार ने न तो मूल्य सीमाएं न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर समिति का गठन किया, और न ही आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज किए गए मामले वापस लिए गए.

2020 को किसानों ने शुरू किया था आंदोलन: बता दें, केन्द्र सरकार के तीन नये कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन की शुरुआत की थी. किसानों का आंदोलन नवंबर 2020 में शुरू हुआ था. किसान तेज धूप, भारी बारिश और भीषण ठंड में भी दिल्ली के विभिन्न बॉर्डर पर डटे रहे. आंदोलन के एक साल के बाद पीएम मोदी ने साल 2021 में गुरुपर्व के मौके पर तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा की थी.
भाषा इनपुट के साथ

जेल में ही रहेंगे सत्येंद्र जैन, मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

जेल में ही रहेंगे सत्येंद्र जैन, मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

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कोर्ट के फैसले को ठेंगा दिखाते शेंगन देश

यूरोप की शीर्ष अदालत के फैसले के बाद भी जर्मनी, डेनमार्क और अन्य शेंगन देशों ने 2015 से भीतरी बॉर्डर कंट्रोल को जारी रखा है. कानून के इस उल्लंघन पर यूरोपीय आयोग की आंखें भी बंद हैं.

शेंगन एग्रीमेंट के तहत यूरोप के 26 देशों के आपसी बॉर्डर पर बिना जांच के लोगों और सामान की मुक्त आवाजाही होनी चाहिए. शेंगन एरिया में भीतर बॉर्डर कंट्रोल तभी लागू किया जाएगा जब घरेलू सुरक्षा को गंभीर खतरा हो. आप्रवासियों की बढ़ती संख्या और आतंकवाद संबंधी चिंताओं के बीच जर्मनी, ऑस्ट्रिया, नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क और फ्रांस ने 2015 से ही अपनी सीमाओं पर जांच व निगरानी बढ़ा दी है. भीतरी बॉर्डर कंट्रोल को अब छह महीने और बढ़ा दिया गया है.

अप्रैल में यूरोपियन कोर्ट ऑफ जस्टिस ने आदेश दिया था कि खतरे की एक चेतावनी के लिए लागू किया गया बॉर्डर कंट्रोल छह महीने से लंबा नहीं हो सकता है. कोर्ट के उस फैसले के बाद यह दूसरा मौका है जब इंटर्नल बॉर्डर कंट्रोल की समयसीमा बढ़ाई गई है.

डीडब्ल्यू ने जब 2019 के डाटा की पड़ताल की तो पता चला कि ये बॉर्डर कंट्रोल शेंगन एग्रीमेंट के कई नियमों का उल्लंघन करता है. यह एग्रीमेंट यूरोपीय संघ के 22 देशों और आइसलैंड, लिष्टेनश्टाइन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड पर लागू होने वाला कानून है.

'राजनीतिक रूप से बहुत संवेदनशील'

यूरोपीय संघ में कानून तोड़ने वाले सदस्य देशों पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी यूरोपीय आयोग की है. इस तरह के उल्लंघन भारी वित्तीय प्रतिबंधों को न्योता दे सकते हैं. उदाहरण के लिए 2018 को लें. यूरोपीय संघ के कानूनों के मुताबिक ईयू के हर नागरिक की उचित मूल्य वाले बैंक अकाउंट तक पहुंच होनी चाहिए. इसके उल्लंघन के मामले में आयोग ने स्पेन पर हर दिन 50,000 यूरो का जुर्माना लगाया. जुर्माना तब तक जुड़ता रहा, जब तक स्पेन ने इस नियम को अपना राष्ट्रीय कानून नहीं बनाया.

हालांकि लंबे समय से चले आ रहे बॉर्डर कंट्रोल मामले पर आयोग ने अभी तक किसी सदस्य देश पर कार्रवाई शुरू नहीं की है. गीजन यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल लॉ एंड यूरोपियन लॉ के रिसर्चर लियोन त्सुएलिग कहते हैं, "यह मुद्दा राजनीतिक रूप से बहुत संवेदनशील है." अपने रिसर्च पेपर में वह लिखते हैं, "सदस्य देश और उनके आतंरिक मामलों के मंत्रियों को ये आग बबूला कर देगा."

इस पर प्रतिक्रिया देने की डीडब्ल्यू की दरख्वास्त का यूरोपीय मूल्य सीमाएं आयोग ने कोई जवाब नहीं दिया. जनवरी 2021 में यूरोपीय संसद की एक कार्यवाही के दौरान आयोग ने तर्क दिया कि हालात के मुताबिक नए नियम बनाना, कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन के मुकाबले बेहतर तरीका है. आयोग ने माना कि सदस्य देश जिस तरह नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उसे देखकर यही लगता है कि कानूनी असरदार नहीं रह गए हैं.

आयोग की हालिया "स्टेट ऑफ शेंगन" रिपोर्ट में "लंबे समय से चले आ रहे बॉर्डर कंट्रोल को खत्म करने" को 2023 की प्राथमिकता सूची में रखा गया है.

ऐसा लगता है जैसे आयोग नए नियमों का संकेत देते हुए सदस्य देशों को बॉर्डर कंट्रोल बंद करने के लिए प्रेरित कर रहा है. ऐसा एक प्रस्ताव 2017 में नाकाम हो चुका है. तब काउंसिल ऑफ द यूरोपियन यूनियन के सदस्य देशों की सरकारों के मंत्रियों ने इसका समर्थन नहीं किया.

बड़े निगरानी तंत्र पर निर्भर प्रस्तावित सुधार

यूरोपीय आयोग का ताजा प्रपोजल, शेंगन एरिया में कई नियमों को बदलने का संकेत दे रहा है. प्रस्ताव, सदस्य देशों को बॉर्डर कंट्रोल की जगह कई किस्म के "वैकल्पिक तरीके" मुहैया कराना चाहता है. सुधारों पर बात करते समय सदस्य देशों ने खास तौर पर यूरोपीय संघ के बाहरी बॉर्डर पर इस्तेमाल होने वाली सर्विलांस तकनीक को शेंगन एरिया के भीतर भी यूज करने की मांग की है.

इन तकनीकों के जरिए प्रशासन ऑटोमैटिक तरीके से निगरानी और डाटा कलेक्शन कर सकेगा. उदाहरण के लिए, यात्री के नाम और उससे जुड़ी जानकारियां स्टोर की जा सकेंगी. लियोन त्सुएलिग इसे "अदृश्य" बॉर्डर कंट्रोल कहते हैं, "मौलिक अधिकारों के नजरिए से देखें तो ये कदम, फिजिकल बैरियर से भी ज्यादा खतरनाक हैं. क्योंकि ये आखिर में एक बड़ी निगरानी व्यवस्था पर निर्भर हैं- जो यूरोपीय नागरिकों की भी होगी."

ये विकल्प, बॉर्डर पर भेदभाव का जोखिम भी बढ़ा सकते हैं. पीआईसीयूएम नाम का एनजीओ बगैर दस्तावेज वाले आप्रवासियों के मानवाधिकारों की आवाज उठाता है. एनजीओ को लगता है कि ये तकनीक नस्ल के आधार पर प्रोफाइलिंग का जोखिम पैदा कर सकती है. संस्था के मुताबिक ऐसी कई रिपोर्टें आ चुकी हैं, जो दिखाती है कि तकनीक हाशिए पर रह रहे लोगों के प्रति पूर्वाग्रह को बढ़ाती है.

प्रस्ताव फिलहाल यूरोपियन पार्लियामेंट की सिविल लिबर्टीज, जस्टिस एंड होम अफेयर्स कमेटी के पास है. कमेटी ने इसे लेकर एक ड्राफ्ट रिपोर्ट पेश की है. रिपोर्ट में प्रस्ताव के कुछ अहम सेक्शनों को पूरी तरह हटाने का सुझाव दिया गया है. सुझाव चेतावनी देते हुए कहता है, "ऐसी ज्यादा जांचों की अनुमति देना जो बॉर्डर कंट्रोल की तरह मूल्य सीमाएं दिखें और महसूस हों, ये भीतरी सीमाओं के बगैर यूरोपीय नागरिकों को स्वतंत्र, सुरक्षित और न्यायपूर्ण इलाका प्रदान करने के लक्ष्य से मेल नहीं खाता है."

खुआन फेरनांडो लोपेज अगुइलार समिति के चेयरपर्सन हैं. डीडब्ल्यू से बातचीत में उन्होंने कहा, "किसी भी तकनीकी विकास को, मौलिक अधिकारों के चार्टर, ईयू डाटा और प्राइवेसी मानकों के साथ मेल खाना चाहिए, ये दुनिया में सबसे ऊंचे हैं." बीते बरसों में यूरोपीय संसद बॉर्डर पर जारी कंट्रोलों की आलोचना कर चुकी है. संसद अकसर राष्ट्रीय सुरक्षा से ज्यादा मुक्त आवाजाही का समर्थन करती रही है.

अब देखना है कि समिति के ये सुझाव, यूरोपीय आयोग और संघ के सदस्य देश स्वीकार करेंगे या मूल्य सीमाएं नहीं. इस बीच मुक्त आवाजाही वाले शेंगन एरिया के भीतर कोर्ट के फैसले और एंग्रीमेंट को ठेंगा दिखाने वाला बॉर्डर कंट्रोल लगातार आठवें साल में प्रवेश करने मूल्य सीमाएं जा रहा है.

RAIPUR : किसानों को बिना ब्याज के लाख की खेती के लिए मिलेगा ऋण,छत्तीसगढ़ सरकार का अहम् फैसला

रायपुर, 19 नवम्बर | मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश के अनुरूप छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा किसानों को लाख की खेती के लिए प्रोत्साहित करने और उनकी आय में वृद्धि हेतु विशेष पहल की जा रही है। इसके परिपालन में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा बीहन लाख आपूर्ति तथा बीहन लाख विक्रय और लाख फसल ऋण की उपलब्धता के लिए मदद सहित आवश्यक व्यवस्था की गई है। राज्य में वर्तमान में 4 हजार टन लाख का उत्पादन होता है, जिसका अनुमानित मूल्य राशि 100 करोड़ रूपए है। राज्य में मूल्य सीमाएं लाख उत्पादन को 10 हजार टन तक बढ़ाते हुए 250 करोड़ रूपए की आय कृषकों को देने का लक्ष्य है।

राज्य में बीहन लाख की कमी को दूर करने हेतु कृषकों के पास उपलब्ध बीहन लाख को उचित मूल्य पर क्रय करने के लिए क्रय दर का निर्धारण किया गया है। इसके तहत कुसुमी बीहन लाख (बेर वृक्ष से प्राप्त) के लिए कृषकों को देय क्रय दर 550 रूपए प्रति किलो ग्राम तथा रंगीनी बीहन लाख (पलाश वृक्ष से प्राप्त) के लिए कृषकों को देय क्रय दर 275 रूपए प्रति किलोग्राम निर्धारित है। इसी तरह कृषकों को बीहन लाख उपलब्ध कराने हेतु विक्रय दर का भी निर्धारण किया गया है। इसके तहत कुसुमी बीहन लाख (बेर वृक्ष से प्राप्त ) के लिए कृषकों को देय विक्रय दर 640 रूपए प्रति किलोग्राम और रंगीनी बीहन लाख (पलाश वृक्ष से प्राप्त) के लिए कृषकों को देय विक्रय दर 375 रूपए प्रति किलोग्राम निर्धारित है।

राज्य सरकार द्वारा किसानों को लाख की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए जिला सहकारी बैंक के माध्यम से लाख फसल ऋण निःशुल्क ब्याज के साथ प्रदाय करने हेतु व्यवस्था की गई है। इसके तहत लाख पालन करने हेतु पोषक वृक्ष कुसुम पर 5 हजार रूपए, बेर पर 900 रूपए तथा पलाश पर 500 रूपए प्रति वृक्ष ऋण सीमा निर्धारित है। लाख पालन को वैज्ञानिक पद्धति से करने हेतु राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा कांकेर में प्रशिक्षण केन्द्र खोला गया है। इस केन्द्र में 03 दिवसीय संस्थागत प्रशिक्षण के साथ लाख उत्पादन क्लस्टर में ऑनफार्म प्रशिक्षण मूल्य सीमाएं भी दिया जा रहा है।

राज्य में योजना के सफल क्रियान्वयन और लाख उत्पादन में वृद्धि करने के लिए 20 जिला यूनियनों में 03 से 05 प्राथमिक समिति क्षेत्र को जोड़ते हुए लाख उत्पादन क्लस्टर का गठन भी किया गया है। इसके तहत प्रत्येक लाख उत्पादन क्लस्टर में सर्वेक्षण कर कृषकवार बीहन लाख की मांग की जानकारी ली जा रही है। इनमें कृषकों को संघ द्वारा निर्धारित मूल्य पर बीहन लाख प्रदाय करने हेतु आवश्यक कुल राशि को अग्रिम रूप से जिला यूनियन मूल्य सीमाएं खाते में जमा कराना होगा। इसके तहत कुसुमी बीहन लाख के लिए कृषकों से प्राप्त मांग के अनुरूप राशि जमा किए जाने हेतु 15 दिसंबर तक समय-सीमा निर्धारित है।

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