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अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश
भारत और यूके के बीच एक दीर्घकालिक, अत्यधिक सहयोगात्मक संबंध है जिस वजह से दोनों देशों में समृद्धि को बढ़ावा मिलता है। इस वर्ष भारत ने अपने प्रभावशाली रिकॉर्ड में और इजाफा किया है और यूके में दूसरा सबसे बड़ा रोजगार निर्माता के रूप में उभरा है। भारत के साथ हमारे विकास के क्षेत्र में दोतरफा संबंध हैं क्योंकि यूके भारत का सबसे बड़ा जी20 निवेशक भी है। हम आगामी भारत यूके टेक समिट के दौरान इस रणनीतिक साझेदारी को आधार बनाना चाहते हैं। यह टेक समिट व्यापार, नवोन्मेष, शोध, शिक्षा और उद्यमिता के क्षेत्र में भारत-यूके के बीच प्रगाढ़ साझेदारी का अब तक का सबसे बड़ा जश्न होगा।

अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय के प्रवेश प्रारूप को प्रभावित करने वाले घटक - Factors affecting the entry format of international business

अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय के प्रवेश प्रारूप को प्रभावित करने वाले घटक - Factors affecting the entry format of international business

(क) निगमित उद्देश्य:

मूल कंपनी के उद्देश्य प्रवेश प्रारूप को प्रभावित करते है। यदि वैश्विक कंपनी उत्पादन कियाओं पर पूर्ण नियंत्रण रखना चाहती है तो इसे व्यापार रूट अपनाना चाहिए। यदि वैश्विक कंपनी विदेशों में उपलब्ध सस्ते व बेहतर अम अच्छी क्वालिटी के कच्चे माल, सस्ते कच्चे माल आदि का लाभ उठाना चाहती है, तो विदेशों में उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करना अर्थात् निवेश रूट अपनाना बेहतर होगा। यदि विदेशी कंपनी के पास निवेश योग्य कोप अधिक है तो निवेश रूट को अपनाया जाएगा। यदि वैश्विक कंपनी के पास निवेश योग्य कोष कम है, तो व्यापार रूट अपनाया जाएगा।

(ख) मूल कंपनी के पास संसाधनों की उपलब्धताः

यदि वैश्विक कंपनी के पास विविध संसाधन, जैसे- वित्तीय संसाधन, भौतिक व मानवीय संसाधन प्रबंध कौशल, संस्थागत व बांड छवि अच्छी है.

तकनीकी व अनुसंधान विकास योग्यताएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, तो वैश्विक कपनी निवेश रूट अपना सकती है परंतु यदि संसाधनों का अभाव है तो व्यापार रूट बेहतर होगा।

(ग) मेजबान देश में वातावरणीय घटक:

मेजबान देश अर्थात जिस देश में व्यवसाय का प्रसार किया जाना है, वहां के व्यावसायिक वातावरणीय घटक भी प्रवेश ढंग को प्रभावित करते है। ये वातावरणीय घटक-राजनीतिक वातावरण, सांस्कृतिक वातावरण, वैधानिक व नियमन वातावरण आर्थिक वातावरण आदि हो सकते है। बाजार का आकार आय स्तर, शिक्षा स्तर, लोगों की कय क्षमता, जीवन-स्तर आदि प्रवेश प्रारूप के चयन को बहुत प्रभावित करते हैं। इसी प्रकार मेजबान देश में भौतिक अधोसंरचना, बैंकिंग व बीना संबंधी सुविधाएं पोर्ट सुविधाएं आदि भी प्रवेश प्रारूप को प्रभावित करती है यदि मेजबान का व्यावसायिक वातावरण अच्छा है। तो निवेश रूट बेहतर होगा।

मेजबान देश में बाजार का आकार विशाल होने पर निवेश रूट बहुत उपयुक्त होगा। परंतु यदि मेजबान देश में बाजार का आकार छोटा है, तो व्यापार रूट उपयुक्त होगा। बहुत सी बहुराष्ट्रीय कंपनिया चीन और भारत में प्रवेश के लिए निवेश प्रारूप अपना रही है, क्योंकि यहा जनसंख्या आकार अधिक होने के कारण माग अधिक है। सरकार की नीतिया भी विदेशी निवेश को आकर्षित करती है। यदि किसी मेजबान देश में सरकार ने किसी विशेष उद्योग में विदेशी निवेश पर प्रतिबंध लगा रखा है तो उस उद्योग में निवेश रूट को नही अपनाया जा सकता। यहां व्यापार रूट ही अपनाना पड़ेगा।

(घ) उत्पादन घटकों की लागत:

यदि मेजबान देश में उत्पादन के घटकों की लागत कम है, जैसे कि विकासशील देशों में श्रम लागत कम है तो बहुराष्ट्रीयकपनिया सस्ती श्रम लागत का लाभ उठाने के लिए वहां निवेश रूट अपनाकर उत्पादन इकाइयां स्थापित करती हैं।

इसी प्रकार यदि मेजबान देश में उच्च क्वालिटी का कच्चा माल कम लागत पर उपलब्ध है तो बहुराष्ट्रीय कंपनिया ऐसे देशों में निवेश रूट अपना कर उत्पादन इकाइयां स्थापित करती है। फिर यहां से उत्पाद मेजबान देश में बेचे जाते हैं तथा अन्य देशों में भी यहीं से उत्पाद निर्यात किए जाते हैं।

(ङ) मेजबान देश में अधोसंरचना की उपलब्धता: यदि मेजबान देश में अधोसंरचना सबधी सुविधाएं जैसे- सड़क, रेलवे, समुद्री बंदरगाह, बैंक, वेयरहाउस, विपणन मध्यस्थ आदि पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है तो निवेश रूट को प्राथमिकता दी जाती है जैसे बहुत-सी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने निवेश रूट अपना कर अपना उत्पादन आधार चीन में स्थापित किया है। क्योंकि वहां उच्च क्वालिटी की अधोसरचना सुविधाएं उपलब्ध है। यदि मेजबान देश में अधोसंरचना सुविधाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है, तो निवेश रूट के स्थान पर अप्रत्यक्ष निर्यात रूट अपनाना होगा। इसमें विदेशी कंपनी मेजबान देश के अंतिम उपभोक्ताओं को उत्पाद न बेच कर वहाँ के विपणन मध्यस्थों को उत्पाद निर्यात करती हैं।

यद्यपि अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय के सभी प्रारूपों में जोखिम है, परंतु फिर भी व्यापार रूट में जोखिम की मात्रा कम है, जबकि निवेश रूट में जोखिम की मात्रा अत्यधिक है। व्यापार रूट में भी प्रत्यक्ष निर्यातों में जोखिम की मात्रा अप्रत्यक्ष निर्यातों की तुलना में अधिक है। यदि मूल कंपनी की जोखिम वहन क्षमता अधिक है तब ही इसे निवेश रूट अपनाना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय में प्रवेश के प्रारूप / विधियां

अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय में प्रवेश के विभिन्न प्रारूप निम्नलिखित हो सकते हैं:

(ख) अनुबंधीय प्रवेश प्रारूप

इन प्रारूपों की चर्चा निम्नलिखित है:

इसमे प्रत्यक्ष निर्यात, अप्रत्यक्ष निर्यात व प्रति व्यापार शामिल है।

(i) प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष निर्यातः प्रत्यक्ष निर्यात में विदेशी कंपनी अपने एजेंटों के माध्यम से मेजबान देश में अंतिम उपभोक्ताओं को सीधे उत्पाद निर्यात करती है। निर्यातक स्वयं निर्यात व्यापार जुड़े जोखिम का वहन करता है

औद्योगिक उत्पादों का निर्यात प्रत्यक्ष रूप से ही किया जाता है। अप्रत्यक्ष निर्यात में उत्पाद अंतिम उपभोक्ताओं को नहीं बल्कि मेजबान देश के विपणन मध्यस्थों को बेचा जाता है। ये विपणन मध्यस्थ निर्यात से जुड़े जोखिम का वहन करते है। कई बार ये उत्पाद निर्यात प्रबंध कंपनी को बेच दिए जाते हैं। यदि ये निर्यात प्रबंध कंपनी कमीशन आधार पर कार्य करती है अर्थात एजेंट की तरह उत्पाद बेचती हैं तो इसे प्रत्यक्ष निर्यात में शामिल किया जाता है परंतु यदि यह कमीशन आधार पर कार्य न करके अपने ही नाम से विदेशी बाजार में उत्पद बेचती है जोखिम का वहन करती है लाभ या हानि का वहन करती है अर्थात स्वतंत्र रूप से कार्य करती है न कि निर्यातक के एजेंट के रूप में तो ऐसे व्यापार व्यवहार को अप्रत्यक्ष निर्यात में शामिल किया जाता है।

(ii) प्रति व्यापार प्रति व्यापार ऐसा अनुबंध है जिसमें निर्यात करने के लिए मूल्य का आयात करना होता है

वह समझौता दो राष्ट्रों के बीच होता है जिसमे एक देश दूसरे देश से इस शर्त पर आयात करता है कि दूसरा देश भी पहले देश के बराबर मूल्य की वस्तुओं का आयात करे। इस तरह के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में विदेशी मुद्रा की आवयकता नहीं पड़ती और देश के भुगतान शेष पर कोई भार नहीं पड़ता। यह एक तरह का वस्तु विनिमय व्यापार है। प्राचीन काल में विभिन्न देशों के बीच इसी तरह का व्यापार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश होता था क्योकि इसमें मुद्रा की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। समय के साथ मुद्रा का विकास हुआ और मुद्रा को विभिन्न व्यवहारों के विनिमय में स्वीकार किया जाने लगा। मुद्रा के विकास से प्रति व्यापार में और भी लोचशीलता आ गई। अब दो देशों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वस्तुओं का विनिमय एक ही समय पर होना अनिवार्य नही रहा इससे प्रति व्यापार का विकास हुआ। अब एक देश आयात करते समय दूसरे देश पर एक निश्चित समय अवधि में उतने ही मूल्य की वस्तुओं को आयात करने की शर्त लगाता है अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रति व्यापार आज भी प्रचलित है। बहुत से देश आपस में प्रति व्यापार समझौते करके अंतरराष्ट्रीय व्यापार करते हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रतिव्यापार उन दशाओं में बहुत उपयोगी है जब देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा न हो।

How to invest in foreign stocks: जानें कैसे आप Google, Facebook जैसे स्टॉक्स में निवेश कर सकते हैं

शेयर बाजार में निवेश करना वर्तमान दौर में बेहद आसान हो चुका है अब आप सिर्फ अपने एक स्मार्टफोन से किसी भी कंपनी के शेयर मिनटों में खरीद या बेच सकते हैं। वर्तमान में देश के दोनों बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE तथा BSE में कुल मिलाकर 7,000 से अधिक कंपनियाँ लिस्टेड हैं, जिनमें आप आसानी से निवेश कर सकते हैं।

लेकिन यदि आप देश से बाहर Google, Apple, Facebook, Tesla, Amazon जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों में निवेश करने में रुचि रखते हैं तो इसके लिए प्रक्रिया सामान्य से थोड़ी अलग है। आज इस लेख के माध्यम से समझेंगे कैसे आप भारत में रहते हुए विदेशी स्टॉक्स में पैसा निवेश कर सकते हैं (How to invest in foreign stocks) तथा यह घरेलू निवेश से कितना अलग है।

कैसे करें विदेशी कंपनियों में निवेश

भारत से अंतर्राष्ट्रीय शेयरों में निवेश करना बिल्कुल कानूनी है, हालाँकि इसके लिए कुछ विशेष प्रक्रिया से गुजरने की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश आवश्यकता होती है। देश से विदेशी शेयरों में निवेश करने के विभिन्न तरीके हैं, जिनकों हम यहाँ विस्तार से समझेंगे। अमेरिकी शेयर बाजार में एक लोकप्रिय सूचकांक NASDAQ हालिया समय में भारतीय निवेशकों को खासा आकर्षित कर रहा है और भारत से विदेशी स्टॉक्स में निवेश पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ा है। आइए अब देखते हैं कुछ ऐसे तरीकों को जिनके द्वारा आप विदेशी कंपनियों में अपना पैसा इन्वेस्ट कर सकते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म (International Brokerage)

ब्रोकरेज फर्म ऐसी फर्म होती हैं, जो निवेशकों और ट्रेडर्स को शेयर बाजार में लिस्टेड स्टॉक खरीदने और बेचने की सुविधा देते हैं। ब्रोकरेज फर्म बायर्स और सैलर्स के बीच एक बिचौलिये के रूप में कार्य करती है और सभी के लिए एक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म प्रदान करती है। भारत में मौजूद ब्रोकरेज फर्म की बात करें तो इनमें Zerodha , Upstox, Angel One, ICICI Direct कुछ प्रमुख नाम हैं।

ऊपर बताए गए ब्रोकरेज फर्म आपको केवल भारतीय स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों में ही निवेश की सुविधा देते हैं, जबकि अंतर्राष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म के माध्यम से आप देश के बाहर भी किसी अन्य कंपनी में निवेश कर सकते हैं। ऐसा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश करने से पहले, आपको एक अंतर्राष्ट्रीय ब्रोकरेज एकाउंट खोलने तथा आरबीआई की Liberalized Remittance Scheme आदि की औपचारिकताओं से गुजरना होगा।

कुछ प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म की बात करें तो इनमें Interactive Brokers, Saxo Bank, Capital.com, Vested Finance आदि शामिल हैं। हालाँकि ये ब्रोकरेज फर्म घरेलू फर्म की तरह एक सुविधाजनक ट्रेडिंग इंटेरफेस प्रदान करती हैं लेकिन किसी घरेलू ब्रोकरेज फर्म के विपरीत इनके ब्रोकरेज तथा अन्य सेवा शुल्क तुलनात्मक रूप से अधिक हो सकते हैं, इसके साथ ही कुछ अंतर्राष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म विदेशी स्टॉक्स में निवेश करने के लिए निवेश की एक न्यूनतम सीमा जैसे US$10,000 भी तय कर सकते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय म्यूचुअल फंड्स (International Mutual Funds)

म्यूचुअल फंड्स सामान्यतः अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश ऐसे लोगों के लिए शेयर बाजार में निवेश करने का माध्यम है, जो स्वयं स्टॉक्स का चुनाव करने में सक्षम नहीं हैं अथवा ऐसा करने का जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं। इसमें बहुत लोग पैसे लगाकर एक फंड तैयार करते हैं और इस फंड का प्रबंधन करने वाले लोग इन्हें विभिन्न स्टॉक्स में निवेश करते हैं।

ब्रोकरेज फर्म की तरह म्यूचुअल फंड्स भी आपको घरलू बाजार अथवा अंतर्राष्ट्रीय बाजार में निवेश करने का मौका देते हैं, अंतर्राष्ट्रीय म्यूचुअल फंड ऐसे इक्विटी फंड हैं, जो मुख्य रूप से भारत के बाहर सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं। ये फंड्स सामान्यतः म्यूचुअल फंड के निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने में मदद करते हैं ताकि एक बेहतर रिटर्न प्राप्त किया जा सके।

गौरतलब है कि, पोर्टफोलियो में विविधता के कारण ऐसे फंड्स में निवेश करना घरेलू म्यूचुअल फंड की तुलना में जोखिम भरा भी होता है। अगर आप भी म्यूचुअल फंड के माध्याम से किसी विदेशी कंपनी में निवेश करना चाहते हैं तो ऐसे कुछ मुख्य म्यूचुअल फंड्स निम्नलिखित हैं

  • Kotak NASDAQ 100 Fund of Fund (Growth)
  • ICICI Prudential US Blue-chip Equity Fund (Growth)
  • PGIM India Global Equity Opportunities Fund (Growth)
  • Motilal Oswal Nasdaq 100 Fund of Fund (Growth)
  • DSP World Mining Fund (Growth)

भारतीय एक्सचेंज द्वारा

भारत में शेयर बाजार में निवेश करने के लिए मुख्यतः दो बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE तथा BSE हैं, लेकिन यदि आप विदेशी कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं तो ये एक्सचेंज उसकी सुविधा भी देते हैं। इसके लिए दोनों ही स्टॉक एक्सचेंज की सबसीदारी कंपनियाँ हैं। उदाहरण के तौर पर NSE की सहयोगी कंपनी NSE International Exchange (NSE IFSC) तथा BSE की सहयोगी कंपनी The India International Exchange (IFSC) Limited भारतीयों को विदेशी शेयरों में निवेश करने का मौका देती हैं।

इन दोनों कंपनियों में घरेलू ब्रोकर्स के विपरीत दूसरे ब्रोकर रजिस्टर होते हैं, जो ट्रेडर के ऑर्डर के आधार पर उनके लिए शेयरों को खरीदने या बेचने का काम करते हैं। इन ब्रोकर्स के साथ डीमैट खाता खोलने के बाद आप अपने स्थानीय बैंक खाते से इनके बैंक खाते में धनराशि ट्रांसफर कर सकते हैं और एक बार जब फंड आपके ब्रोकर के खाते में ट्रांसफर हो जाए तो आप आसानी से ट्रेड कर सकते हैं। ध्यान देने योग्य बात है कि, अन्य अंतर्राष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म के विपरीत यहाँ आप बस कुछ चुनिंदा कंपनियों में ही निवेश कर सकते हैं।

विदेशी निवेशकों का 76% निवेश अकेले भारत में: एशिया में निवेश किए कुल 60 हजार करोड़ में से 45.5 हजार करोड़ भारत आए, दक्षिण कोरिया दूसरे स्थान पर

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने इस माह अब तक एशिया के नौ प्रमुख बाजारों में 7.5 अरब डॉलर (59,876 करोड़ रुपए) का शुद्ध निवेश किया है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, इसमें से सबसे ज्यादा 5.7 अरब डॉलर (45,506 करोड़ रुपए) भारतीय बाजार में आए हैं। करीब 2 अरब डॉलर निवेश के साथ दक्षिण कोरिया इस मामले में दूसरे स्थान पर रहा है।

विश्लेषकों अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश का कहना है कि चीन को छोड़कर बाकी एशियाई बाजारों को लेकर विदेशी निवेशकों का उत्साह अब भी बना हुआ है। खास तौर पर भारतीय बाजार में उनका निवेश बढ़ने की संभावना है।

दरअसल, बीते साल अक्टूबर से लेकर इस वर्ष जून तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में रिकॉर्ड 33 अरब डॉलर (करीब 2.60 लाख करोड़ रुपए) की बिकवाली की थी। उसके बाद उनकी वापसी हो रही है, क्योंकि उन्हें भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटती नजर आ रही है।

वूड ने दिखाया भारत पर भरोसा
जेफरीज के ग्लोबल इक्विटी हेड क्रिस्टोफर वूड ने भारतीय बाजार पर काफी भरोसा दिखाया है। उन्होंने लंबी अवधि के लिए अपने पोर्टफोलियो में एशियाई बाजारों की जो हिस्सेदारी रखी है, उसमें सबसे ज्यादा 40% वेटेज भारतीय बाजार को दिया है।

ब्याज दरों में बढ़ोतरी बेअसर
महंगाई के खिलाफ रिजर्व बैंक के आक्रामक रुख का शेयर बाजार पर ज्यादा असर नहीं हुआ है। मई से अब तक RBI ने रेपो रेट 1.40% बढ़ाया है। इसके बावजूद जून के मध्य से लेकर अब तक निफ्टी में 16.5 फीसदी उछाल आया है।

हफ्ते के आखिरी दिन मामूली बढ़त पर बंद हुआ सेंसेक्स
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूती के बीच शुक्रवार को सेंसेक्स 59 अंकों की तेजी के साथ 58,834 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 36 अंक चढ़कर 17,559 के स्तर पर रहा। इस कारोबारी हफ्ते में सेंसेक्स में 812 अंक (1.36%) और निफ्टी में 200 अंक (1.12%) की गिरावट देखने को मिली। बीते शुक्रवार (19 अगस्त) सेंसेक्स 59,646 और निफ्टी 17,758 पर बंद हुए थे।

गिरते बाजार से कैसे कमाएं मुनाफा, कौन से स्टॉक में करें निवेश, बता रहे हैं एक्सपर्ट सुमित बगड़िया

भारत समेत दुनिया के अधिकांश देशों में महंगाई (Inflation) बढ़ रही है. बैंक ब्याज दर बढ़ा रहे हैं और शेयर बाजार में गिरावट लगातार जारी है. ऐसे में क्या ये मंदी की आहट है, और अगर मंदी की दस्तक होती है तो इसका क्या असर होगा. इन मुद्दों पर जानिए क्या है एक्सपर्ट की राय.

Stock Market News

भारत समेत दुनिया के अधिकांश देशों में महंगाई (Inflation) बढ़ रही है. बैंक अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश ब्याज दर बढ़ा रहे हैं. और शेयर बाजार में गिरावट लगातार जारी है. ऐसे में क्या ये मंदी की आहट है. इसी मुद्दे पर बात शेयर बाजार के जाने-माने जानकार और ब्रोकरेज हाउस चॉइस ब्रोकिंग के कार्यकारी निदेशक सुमित बगड़िया ने प्रभात खबर प्राइम में बात की.

देश दुनिया में जो आर्थिक माहौल बन रहा है क्या ये मंदी का संकेत है

जी हां ये मंदी का संकेत तो है. महंगाई बढ़ने से ब्याज दर बढ़ रहे हैं. ग्लोबल बाजार और घरेलू बाजार में करेक्शन का माहौल छाया हुआ है. बीते तीन महीनों में देश और दुनिया के बाजार में गिरावट का दौर देखने को मुला है. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रुपया गिर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश रहा है. जबतक महंगाई बढ़ती रहेगा ब्याज दर के बढ़े की संभावना बनी रहेगी. उन्होंने कहा कि रिस्की महौल बना हुआ है.

जिस तरह से बाजार में गिरावट है क्या ये स्टॉक खरीदने का सही समय है

बाजार में अभी अच्छी खासी गिरावट देखने को मिली है. कई सेक्टर में तो 30 से 40 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. ऐसे में निवेश करने के इच्छुक लोगों के लिए यह बेहतर अवसर हो सकता है. 3 से 6 महीने के लिए अगर कोई निवेशक निवेश करता है तो उसे मुनाफा हो सकता है. उन्होंने कहा अभी खरीदारी का बाजार चल रहा है.

गोल्ड और सिल्वर में अभी निवेश करना कैसा रहेगा

गोल्ड और सिल्वर में निवेश करना अभी के समय में बहुत अच्छा रहेगा. सुमित बगड़िया ने कहा कि गोल्ड और सिल्वर के भाव में गिरावट है. लेकिन आने वाले समय में इसमें तेजी दिखाई देगी. दोनों के रेट नई उंचाईयों को छुएंगे. सुमित बगड़िया ने कहा जो निवेश के इच्छुक हैं वो गोल्ड और सिल्वर में निवेश करें. और जो पहले से ही ख्ररीद कर रखे हैं, वो अभी होल्ड करें. आने वाले समय में इसमें अच्छा रिटर्न मिलेगा. गोल्ड 60 हजार तक के लेबल पहुंच सकता है.

आने वाले समय में निवेशक कैसी रणनीति बनाएं

निवेशक आने वाले बेहतर समय के लिए होल्ड करें. बाजार के तातकालीक परिस्थिति देखकर कोई पैसला न लें. बाजार गिर रहा है यह खरीदारी के लिए बेहतर समय है. उन्होंने कहा कि अभी क्वालिटी स्टॉक की खरीद करें. हर हाल में स्टॉप लॉस जरूर लगाएं.

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भारत की सहायता से यूके अब भी यूरोप का प्रमुख निवेश गंतव्य

DIT India

UK has record breaking year in attracting over 2200 inward investment projects.

यूके ने यूरोप में शीर्ष निवेश गंतव्य का स्थान बनाए रखा है। यूके के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विभाग (डीआइटी) ने वर्ष 2015 से 2016 तक नया आवक निवेश परिणाम जारी किया है जिसके तहत अंतर्राष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा रिकॉर्ड संख्या में देश के भीतर आ रही निवेश परियोजनाओं ने जब से रिकॉर्ड दर्ज होना शुरू हुए हैं तब से अब तक दूसरी सबसे बड़ी संख्या में नई नौकरियों अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश का निर्माण किया है।

  • यूके अब भी यूरोप का शीर्ष निवेश गंतव्य है। भारत यूके में अंतर्राष्ट्रीय नौकरियां पैदा करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश और कुल मिलाकर तीसरे सबसे बड़े निवेशक के रूप में उभरा है।
  • भारत ने 2015-16 में 140 नई परियोजनाओं के साथ यूके को शीर्ष स्थान बनाए रखने में सहायता दी है, साथ ही हजारों नौकरियों पैदा कीं और सुरक्षित भी बनाए रखा है।
  • पारस्परिक संबंध बहुत मजबूत रहा है: यूके भारत में सबसे बड़ा जी20 निवेशक है और इस नजरिए से सबसे बड़ा निर्माता भी है।
  • भारत में संगठित निजी क्षेत्र में हर 20 में एक नौकरी ब्रिटिश कम्पनी द्वारा दी जाती है।

अपने तीन दिवसीय भारत दौरे पर आए यूके के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री डॉ.लियम फॉक्स ने कहा:

इन प्रभावी परिणामों ने यह साबित किया है कि यूके अब भी व्यापार करने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है।

हमने समूचे विश्व में उभरते बाजारों के साथ अपनी पहुंच को व्यापक किया है ताकि यूरोप में सबसे शीर्ष निवेश गंतव्य का दर्जा मजबूती से बनाए रखें। यूके में इस निरंतर विश्वास मत से विदेशी निवेश समूचे यूके में रोजगार निर्माण, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश सुरक्षा और लोगों के लिए अवसरों के निर्माण हेतु आकर्षित होंगे।

एक विशिष्ट अवधि से अधिक समय में 7,015 नई नौकरियों का निर्माण कर भारत यूके में दूसरा सबसे बड़ा नौकरी निर्माता बनकर उभरा है और 140 नई परियोजनाओं के साथ लगातर दूसरी बार ब्रिटेन में तीसरे सबसे बड़े निवेशक के रूप में उभरा है। भारत चीन (हांगकांग समेत) के काफी करीब है, जिसकी 156 परियोजनाएं हैं। यूएस 570 परियोजनाओं के साथ यूके अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश में आवक निवेश का सबसे बड़ा स्रोत रहा। पिछले वर्ष भारत से एफडीआइ में 65 % बढ़ोतरी थी जिस वजह से 7,730 नौकरियां उपलब्ध हुई और साथ ही 2014-15 में 1,620 अधिक नौकरियों को सुरक्षित रखा जा सका।

भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त डॉमिनिक एस्क्विथ ने कहा:

भारत और यूके के बीच एक दीर्घकालिक, अत्यधिक सहयोगात्मक संबंध है जिस वजह से दोनों देशों में समृद्धि को बढ़ावा मिलता है। इस वर्ष भारत ने अपने प्रभावशाली रिकॉर्ड में और इजाफा किया है और यूके में दूसरा सबसे बड़ा रोजगार निर्माता के रूप में उभरा है।

भारत के साथ हमारे विकास के क्षेत्र में दोतरफा संबंध हैं क्योंकि यूके भारत का सबसे बड़ा जी20 निवेशक भी है। हम आगामी भारत यूके टेक समिट के दौरान इस रणनीतिक साझेदारी को आधार बनाना चाहते हैं। यह टेक समिट व्यापार, नवोन्मेष, शोध, शिक्षा और उद्यमिता के क्षेत्र में भारत-यूके के बीच प्रगाढ़ साझेदारी का अब तक का सबसे बड़ा जश्न होगा।

हाल के निवेश के आंकड़े काफी प्रोत्साहित करते हैं। यूके ने यूरोप में विदेशी कम्पनियों के लिए सबसे लोकप्रिय गंतव्य के रूप में एक बार फिर से अपनी बढ़त अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश बनाए रखी है। यूके में कुल मिलाकर 2,213 देश के भीतर आ रही परियोजनाएं रही हैं जो पिछले वर्ष से 11 प्रतिशत अधिक है। इस वजह से तकरीबन 1,16,000 नौकरियां निर्मित और सुरक्षित रहीं-जो आकड़ों के अनुसार दूसरी सबसे बड़ी संख्या रही है।

अधिक जानकारी

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विभाग (डीआइटी) यूके स्थित कम्पनियों को वैश्विक स्तर पर सफल होने में सहायक होता है। हम विदेशी कम्पनियों को यूके की गतिशील अर्थव्यवस्था में उच्च गुणवत्ता के निवेश लाने में सहायता करते हैं।

डीआइटी अपने यूके, और दुनिया भर में फैले ब्रिटिश दूतावासों और अन्य राजनयिक कार्यालयों में अपने विशेषज्ञों के व्यापक नेटवर्क के जरिए विशेषज्ञता और संपर्क प्रदान करता है। हम कम्पनियों को विश्व मंच पर प्रतिस्पर्धा के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराते हैं।

भारत-यूके टेक समिट (7-9 नवम्बर) 2016 के भारतीय-यूके के कलेंडर में एक प्रमुख आयोजन है। व्यापार, विज्ञान, शिक्षा, शोध और अनुसंधान क्षेत्र तक व्यापक रूप से विस्तारित यह आकर्षक अभिनव प्रदर्शनी भी प्रस्तुत करेगा जिसमें सर्वोत्तम, अत्याधुनिक यूके प्रौद्योगिकी, यूके और भारत के दल के सदस्यों से युक्त यूके के प्रमुख वैचारिक नेतृत्व सत्र और स्वास्थ्य सेवा, जीव विज्ञान, भविष्य के शहरों, उन्नत इंजीनियरिंग और निर्माण और कृषि-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र से यूके का उच्च स्तरीय व्यापारिक मिशन का समावेश होगा।

साथ ही इसमें यूके में भारतीय निवेश और उद्यमिता पर रोशनी डाली जाएगी और इसमें टेक रॉकेटशिप पुरस्कार के दस विजेताओं की भी घोषणा की जाएगी। यह पिछले वर्ष नवम्बर में प्रधानमंत्री मोदी की यूके यात्रा के दौरान घोषित ‘ग्रेट कोलैबोरेशन’ के तहत पहल है, जिसमें भारत-यूके साझेदारी का जश्न मनाते हुए नए संबंधों को निर्मित किया जाएगा। टेक समिट में चार समवर्ती शिखर सम्मेलन होंगे-प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और नवोन्मेष, उच्च शिक्षा, डिजाइन, बौधिक संपदा।

अधिक मीडिया जानकारी के लिए संपर्क करें:

स्टुअर्ट एडम्स, अध्यक्ष,
प्रेस एवं संचार,
ब्रिटिश उच्चायोग,
चाणक्यपुरी, नई दिल्ली 110021
टेलीफोन: 24192100; फैक्स: 24192411

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