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बांड में निवेश

बांड में निवेश
What is Bond in Hindi

इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड से टैक्स बचत

वित्त वर्ष 2012 में इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड में निवेश पर अतिरिक्त छूट प्राप्त कर टैक्स बचत कर सकते हैं।

12 नवंबर 2011

आम बजट 2011-12 में वित्तमंत्री ने इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड में निवेश पर टैक्स छूट का लाभ वित्तीय वर्ष 2011-12 में भी जारी रखने का ऐलान किया था। उल्लेखनीय है कि आम बजट 2010-11 में वित्तमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2010-11 में व्यक्तिगत एवं एचयूएफ करदाताओं को आयकर अधिनियम की धारा 80 सीसीएफ के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड में निवेश पर अधिकतम 20 हजार रुपए की अतिरिक्त छूट देने का प्रावधान किया था। यह छूट आयकर अधिनियम की धारा 80 सी, सीसीसी एवं सीसीडी के तहत प्राप्त हो रही एक लाख रुपए की छूट के अतिरिक्त है।

अब आप वित्तीय वर्ष 2011-12 में भी इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड बांड में निवेश में निवेश पर अधिकतम 20 हजार रुपए की आय से अतिरिक्त छूट प्राप्त कर टैक्स बचत कर सकते हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर टैक्स सेविंग बांड के फीचर्स निम्न प्रकार हैं :-

निवेश की पात्रता- व्यक्तिगत (वयस्क) एवं एचयूएफ करदाता इन बांड में निवेश कर सकते हैं। एनआरआई करदाता को इन बांड में निवेश की पात्रता नहीं है।

निवेश की राशि- वैसे तो इन बांड्स में निवेश की अधिकतम कोई सीमा निर्धारित नहीं है। परंतु आयकर अधिनियम की धारा 80 सीसीएफ के तहत अधिकतम 20 हजार रुपए तक की ही छूट प्राप्त की जा सकती है।

निवेश की बांड में निवेश अवधि- सामान्यतः इन बांड में निवेश की अवधि 10 वर्ष होती है।

निवेश के विकल्प- इन बांड में निवेश के विभिन्न विकल्प होते हैं जिसके तहत सालाना ब्याज अथवा मैच्युरिटी पर एकसाथ ब्याज प्राप्त किया जा सकता है।

निवेश पर ब्याज
- वर्तमान वित्तीय वर्ष में इन बॉण्ड में ब्याज दर 8% से 9% प्रतिवर्ष रहने का अनुमान है।

टीडीएस कटौती- इन बांड में टीडीएस कटौती नहीं की जाती है।

लॉक-इन पीरियड- इन बांड में लॉक-इन पीरियड पाँच वर्ष का होता है।

प्रीमैच्युर विड्रॉल- इन बांड में पांच वर्ष के बाद ही प्री-मैच्युर विड्रॉल किया जा सकता है। यह बांड नेशनल स्टॉक एक्सचेंज एवं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होते हैं एवं पांच वर्ष बाद निवेशक इसे स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से विक्रय कर सकते हैं। साथ ही, इन बांड में पांच वर्ष बाद बायबैक ऑप्शन भी होता है जिसके तहत निवेशक पांच वर्ष बाद सीधे कंपनी से भी भुगतान प्राप्त कर सकते हैं।

लोन सुविधा- इन बांड में पांच वर्ष की अवधि तक कोई लोन सुविधा उपलब्ध नहीं होती है।

टैक्स- आयकर अधिनियम की धारा 80 सीसीएफ के तहत इन बांड में निवेश पर आय से 20 हजार रुपए तक की छूट प्राप्त की जा सकती है। इन बांड से प्राप्त ब्याज आय में शामिल किया जाता है, जिस पर करदाता को अपनी टैक्स स्लैब अनुसार टैक्स अदा करना होता है।

कैसे कर सकते हैं निवेश
- विभिन्न इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियां समय-समय पर प्रारंभिक निर्गम (इश्यू) के जरिए यह बांड जारी करती हैं। आप इन इश्यू के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड में निवेश कर सकते हैं।

पोस्ट टैक्स यील्ड-
टैक्‍स स्लैब 10%, पोस्‍ट टैक्‍स यील्‍ड 10%
टैक्‍स स्लैब 20%, पोस्‍ट टैक्‍स यील्‍ड 11.8%
टैक्‍स स्लैब 30%, पोस्‍ट टैक्‍स यील्‍ड 14%
पोस्‍ट टैक्‍स यील्‍ड की गणना वर्तमान वर्ष में प्राप्त होने वाली टैक्स बचत एवं आगामी 5 वर्षों में 8.5% प्रतिवर्ष की दर से प्राप्त ब्याज पर टैक्स की गणना का समायोजन करके की गई है।

प्रस्तावित डायरेक्ट टैक्स कोड (डीटीसी) - प्रस्तावित डायरेक्ट टैक्स कोड के प्रावधानों के तहत यह छूट प्राप्त नहीं की जा सकेगी।

यह लेख अरिहंत कैपिटल मार्केट के चीफ फाइनेंशियल प्लानर उमेश राठी ने लिखा है। [email protected] पर उमेश राठी से संपर्क किया जा सकता है।

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बांड क्या होता है? सरकारी बांड में कैसे निवेश करें

What is Bond in Hindi

What is Bond in Hindi

What is Bond: बांड प्रमुख रूप से एक निवेश प्रपत्र होते हैं यानी के एक उधार प्रपत्र होते हैं। इसके द्वारा देश की सरकार या फिर कॉर्पोरेट हाउस द्वारा निवेशकों (Investors) के लिए बांड जारी करते हैं। सरकार या कंपनी मार्केट से पैसा उधार लेने के उद्देश्य से फंड (Fund) जुटाने के लिए बांड (Bond) जारी करती है।

बांड जारी करता निवेशकों को एक निश्चित ब्याज दर पर एक निश्चित अवधि के लिए बांड जारी करता है। अर्थात जारीकर्ता परिपक्वता की अवधि सुनिश्चित करता है। उस निर्धारित तारीख पर निवेशक की राशि (money) को चुकाने का वादा करता है। और उस पर ब्याज (interest) का भुगतान भी करता है।

सरकार द्वारा जारी होने वाले इन बांधों का प्रयोग नगर पालिका और राज्य एवं संप्रभु सरकारों द्वारा पैसा जुटाने, कंपनियों द्वारा विभिन्न परियोजनाओं और गतिविधियों को वित्त पोषित करने के लिए जारी किया जाता है।

सरकारी बांड निवेश के लिहाज से सबसे सुरक्षित क्यो –

सरकारी बांड निवेश के लिए सबसे सुरक्षित समझे जाते हैं। पहले बड़े निवेशकों को ही सरकारी बॉन्ड में निवेश करने की अनुमति प्राप्त थी। लेकिन बाद में भारत सरकार ने निवेश (invest) करने की प्रक्रिया को आसान बना दिया। अब छोटे निवेशक भी सरकारी बांड की तरफ आकर्षित होने लगे हैं। आप न्यूनतम 10 हजार की धनराशि से सरकारी बांड खरीद सकते हैं।

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सरकारी बांड क्या है (What is Government Bond) –

सरकार पूंजी जुटाने के लिए निवेशकों से एक तरह से ऋण लेती है और एक निवेश पत्र जारी करती है। इसे ही सरकारी बॉन्ड (Bond) कहा जाता है।

सरकारी बांड पर ब्याज दर क्या है? (What is Interest Rate on Government Bond) –

सामान्यता सरकारी बांड पर मिलने वाले ब्याज दर 6 से 8% के बीच रहती है। रिजर्व बैंक के द्वारा ब्याज दर व सरकारी बांड में निवेश बांड की यील्ड के बीच में विपरीत संबंध पाया जाता है। अर्थात यदि ब्याज दरें बढ़ती है तो बांड की यील्ड घट जाती है।

ऑनलाइन कैसे खरीदें बॉन्ड?

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से आसानी से बांड को खरीदा जा सकता है। कई सारे बैंक अपने निवेशकों को यह सुविधा देते है।

जैसे शेयर खरीदने के लिए डीमैट खाते की जरूरत होती है। उसी तरह बांड खरीदने के लिए भी उसे रखने के लिए डीमैट खाते की आवश्यकता होती है। जब आपका डीमैट खाता आपके बैंक बैंक क्लीयरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से जुड़ा होता है, बांड में निवेश तब आप बैंक से सरकारी बांड ऑनलाइन खरीद और बेच सकते हैं और उन्हें अपने डीमैट खाते में भी रख सकते हैं। इसके लिए निवेशक को किसी भी प्रकार की कमीशन का भुगतान नहीं करना पड़ता है।

सरकारी बांड क्यों है निवेश के लिए सुरक्षित –

सरकारी बांड को निवेश के लिए बेहद सुरक्षित माना जाता है क्योंकि यह डेप्ट प्रतिभूतियां होती हैं। और इस पर एक निश्चित ब्याज दर निर्धारित होती है। यही वजह है कि सरकारी बॉन्ड में निवेश को निवेश करने का सबसे सुरक्षित तरीका समझा जाता है। इसमें सुरक्षा की कोई गारंटी होती है। बांड की खासियत यह है कि आप इसे मेच्योरिटी टाइम से पहले भी बेच सकते हैं।

शेयर ब्रोकर के जरिए भी आप बांड को खरीद और बेच सकते हैं। साथ ही स्टॉक मार्केट में किसी भी कारोबारी के दिन आप जब भी चाहे बांड को खरीद सकते हैं और बेच सकते हैं। यह बेहद सुरक्षित माना जाता है क्योकि इसमे ब्याजदर पहले से ही निर्धारित होती है। इस लिये इसमे रिस्क बिल्कुल नही रहता है।

सरकार ने सॉवरेन ग्रीन बांड जारी करने के लिए रूपरेखा की घोषणा की


केंद्र सरकार ने अपने प्रस्तावित सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड के लिए एक रूपरेखा जारी की है। निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में 2022-23 वित्तीय वर्ष में सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड जारी करने का प्रस्ताव दिया था। सरकार ने बाद में कहा कि उसका चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 16,000 करोड़ रुपये के बांड जारी करने का प्रस्ताव है।

सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड क्या है?

सॉवरेन का अर्थ है भारत सरकार। बॉन्ड का मतलब है कि यह एक ऋण पत्र है जो पूंजी या फंड जुटाने के लिए जारी किया जाता है और यह जारीकर्ता पर कर्ज बनाता है।

यहां ग्रीन का मतलब है कि बॉन्ड की बिक्री से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल पर्यावरण बांड में निवेश के अनुकूल परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।

सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड की मुख्य विशेषताएं

योग्य परियोजना का चयन करने के लिए समिति

सरकार मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन की अध्यक्षता में एक 'ग्रीन फाइनेंस वर्किंग कमेटी' का गठन करेगी। समिति वित्तपोषण के लिए पात्र परियोजनाओं का चयन करेगी।

समिति वर्ष में कम से कम दो बार बैठक करेगी और इसमें प्रासंगिक मंत्रालयों, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, नीति आयोग, और वित्त मंत्रालय के बजट प्रभाग और अन्य प्रभाग के सदस्य शामिल होंगे।

किन परियोजनाओं को वित्तपोषित किया जाना है

ग्रीन बॉन्ड द्वारा जारी पूंजी का इस्तेमाल निम्लिखित नौ श्रेणियों की परियोजना को वित्तपोषित या पुनर्वित्त के लिए किया जायेगा :

  • नवीकरणीय ऊर्जा,
  • ऊर्जा दक्षता,बांड में निवेश
  • स्वच्छ परिवहन,
  • जलवायु परिवर्तन अनुकूलन,
  • सतत जल और अपशिष्ट प्रबंधन,
  • प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण,
  • ग्रीन इमारतें,
  • जीवित प्राकृतिक संसाधनों और भूमि उपयोग का सतत प्रबंधन, और
  • स्थलीय और जलीय जैव विविधता संरक्षण

परियोजनाएं जो पात्र नहीं हैं

  • हालाँकि, ग्रीन बॉन्ड के माध्यम से जुटाई गई धनराशि का उपयोग निम्नलिखित परियोजनों के लिए नहीं किया जा सकता है:
  • उन जलविद्युत संयंत्रों के वित्तपोषण के लिए नहीं किया जाएगा जो 25 मेगावाट से बड़े हैं,
  • परमाणु परियोजनाओं और संरक्षित क्षेत्रों से उत्पन्न होने वाले बायोमास के साथ कोई भी बायोमास आधारित बिजली उत्पादन।

किस प्रकार का सरकारी खर्च ग्रीन सॉवरेन बांड के लिए योग्य होगा

बांड बांड में निवेश में निवेश

सॉवरेन गोल्ड बांड में निवेश खुला, 10 जुलाई तक इंवेस्टमेंट का मौका

सॉवरेन गोल्ड बांड में निवेश खुला, 10 जुलाई तक इंवेस्टमेंट का मौका

नई दिल्‍ली। सुरक्षि‍त निवेश करने वाले निवेशकों के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) में इंवेस्‍टमेंट का एक और शानदार मौका है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2020-21 के लिए चौथी सीरीज में निवेश सोमवार से खुल गया है। इसके लिए सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 4,852 रुपये रिजर्व बैंक ने तय की है। बता दें कि इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करने और डिजिटल पेमेंट के जरिए भुगतान करने पर प्रति ग्राम 50 रुपये का डिस्काउंट मिलेगा।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के मुताबिक इस स्कीम में 10 जुलाई, 2020 तक निवेश किया जा सकेगा।

आरबीआई ने अप्रैल में ये ऐलान किया था कि सरकार अप्रैल से सितंबर, 2020 तक 6 किस्तों में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जारी करेगी। रिजर्व बैंक ये बॉन्ड भारत सरकार की ओर से जारी कर रहा है। इससे पहले, 8 से 12 जून के बीच यानी तीसरी सीरीज में सब्सक्रिप्शन के लिए सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड खुला था, जिसका इश्यू प्राइस (कीमत) 4,677 रुपये प्रति ग्राम था। इन बॉन्डों में निवेश करने से सोने के दाम बढ़ने से मिलने वाले फायदे के अलावा सालाना 2.50 फीसदी ब्याज भी मिलता है, जिसका भुगतान 6 महीने में होता है।

उल्‍लेखनीय है कि सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्ड की बिक्री कॉमर्शियल बैंक, भारतीय स्टॉक होल्डिंग निगम लिमिटेड (एसएचसीआईएल) और कुछ चुनिंदा डाकघरों तथा शेयर बाजारों जैसे भारतीय राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से की जाएगी। इस स्कीम के तहत सबसे छोटा बॉन्ड एक ग्राम के सोने के बराबर होगा, जबकि कोई भी व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 500 ग्राम सोने का बॉन्‍ड खरीद सकता है। इस तरह कुल मिलाकर व्यक्तिगत तौर पर बॉन्ड खरीदने की सीमा 4 किलो है, जबकि ट्रस्ट या संगठन के लिए ये सीमा 20 किलोग्राम रखी गई है।

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