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इक्विटी निवेश

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अगर 1964 में बने यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (यूटीआई) को अलग रख दें, तो देश के सबसे पुराने म्यूचुअल फंड, एसबीआई म्यूचुअल फंड ने 29 जून 2017 को अपने 30 साल पूरे कर लिये हैं।

इसका गठन जून 1987 में हुआ था। यूटीआई का फरवरी 2003 में विभाजन हो गया था। इस लिहाज से कह सकते हैं कि वर्तमान म्यूचुअल फंडों में एसबीआई म्यूचुअल फंड ही सबसे पुराना है।
एसबीआई म्यूचुअल फंड के ये 30 साल एक तरह से भारत में म्यूचुअल फंड उद्योग के विकास के तीन दशक हैं, जिसमें खास कर पिछला एक दशक काफी तेज वृद्धि का रहा है। भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग की कुल प्रबंधन अधीन संपदा (एयूएम) 31 मार्च 2007 को 3,260 अरब रुपये की थी, जो 31 मार्च 2017 को बढ़ कर 19,040 अरब रुपये पर पहुँच गयी। यानी इन 10 वर्षों में इसमें लगभग छह गुणा की वृद्धि हुई। इस उद्योग में एसबीआई एमएफ अभी 9.14% बाजार हिस्सेदारी के साथ पाँचवें स्थान पर है। एसबीआई एमएफ का औसत एयूएम 31 मार्च 2017 को 1,57,860 करोड़ रुपये का था। एसबीआई म्यूचुअल फंड को संचालित करने वाली कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट में देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और विश्व की एक प्रमुख फंड मैनेजमेंट कंपनी अमुंडी (फ्रांस) की साझेदारी है।
एसबीआई एमएफ की एमडी एवं सीईओ अनुराधा राव कहती हैं कि इन वर्षों में कंपनी ने खुदरा निवेशकों की बड़ी संख्या को निवेश के समाधान उपलब्ध कराये हैं और 30,000 से अधिक स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों (आईएफए) का भरोसा जीता है। इसके ईडी और सीआईओ नवनीत मुनोट कहते हैं, %भारतीय अर्थव्यवस्था, पूँजी बाजार और म्यूचुअल फंड पिछले तीन दशकों में काफी विकसित हुए हैं और एसबीआई एमएफ ने इस दौरान खुदरा निवेशकों की बचत को वित्तीय संपदाओं की ओर आकर्षित करने में अग्रणी भूमिका निभायी है।Ó वे कहते हैं कि तेज वृद्धि के बीज डाले जा चुके हैं और अगले तीन दशक कहीं ज्यादा उत्साहजनक होने की आशा है।
एसबीआई एमएफ के ईडी और सीएमओ डी. पी. सिंह इन 30 वर्षों में हासिल वृद्धि का श्रेय कंपनी के वितरण नेटवर्क और साझेदारों से मजबूत संबंधों को देते हैं। वे कहते हैं कि इन वर्षों के दौरान एसबीआई एमएफ ने तकनीक का इस्तेमाल करके अपनी सेवाओं का कायापलट कर दिया है ताकि निवेशक और साझेदार एक बेहतर अनुभव पा सकें।
अगर एयूएम के लिहाज से एसबीआई एमएफ की बड़ी योजनाओं को देखें, तो एसबीआई ईटीएफ निफ्टी 50 हाल में 20,000 करोड़ के एयूएम को पार करके देश में सबसे बड़ा इक्विटी फंड बन गया। एसबीआई ब्लूचिप फंड और एसबीआई मैग्नम बैलेंस्ड फंड दोनों का एयूएम 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का हो चुका है।
अभी एसबीआई एमएफ के पास इन पूरे 30 वर्षों से चला आ रहा कोई फंड तो नहीं है, मगर इसके एसबीआई मैग्नम इक्विटी फंड ने 26 साल जरूर पूरे कर लिये हैं। इसकी शुरुआत 1 जनवरी 1991 को हुई थी और इसका पुराना नाम मैग्नम मल्टीप्लायर प्लस Ó90 था। इसे जनवरी 1998 में खुली अवधि वाला (ओपेन एंडेड) फंड बनाया गया। एसबीआई मैग्नम टैक्सगेन का आरंभ 31 मार्च 1993 को हुआ था, जिसने 10 लाख निवेशकों की संख्या पार कर ली है। एसबीआई मैग्नम बैलेंस्ड भी 21 साल से अधिक का हो चुका है। इसका आरंभ 31 इक्विटी निवेश दिसंबर 1995 को हुआ था।
अगर आपने अब से 20 साल पहले एसबीआई मैग्नम इक्विटी फंड (ग्रोथ) में एक लाख रुपये लगाये होते, तो इस समय उसका मूल्य लगभग 20 लाख रुपये होता। इसी तरह अगर आपने 20 साल पहले एसबीआई मैग्नम टैक्स गेन में एक लाख रुपये लगाये होते, तो अभी उसकी कीमत 43 लाख रुपये से अधिक हो चुकी होती। एसबीआई मैग्नम बैलेंस्ड फंड ने भी बीते दो दशकों में इसी तरह का प्रदर्शन किया है। इसकी तुलना में अगर इन 20 वर्षों में सेंसेक्स की वृद्धि देखें, तो यह लगभग 7.3 गुणा हुआ है। यानी अगर इक्विटी लंबी अवधि में संपदा निर्माण का अच्छा जरिया बना है तो इक्विटी म्यूचुअल फंडों ने इक्विटी के मानक सूचकांकों से भी तेज संपदा निर्माण का इतिहास दिखाया है।
पिछले 15 वर्षों में इन तीन फंडों का प्रदर्शन देखें, तो एसबीआई मैग्नम इक्विटी ने 20%, एसबीआई मैग्नम टैक्सगेन ने 24.7% और एसबीआई मैग्नम बैलेंस्ड ने भी 20% औसत वार्षिक चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़त दर्ज की है। इतनी लंबी अवधि में इस तरह का ऊँचा प्रतिफल (रिटर्न) यह दर्शाता है कि इक्विटी निवेश में सही चयन करने और धैर्य बनाये रखने से काफी बेहतर परिणाम पाये जा सकते हैं।
हालाँकि जैसा कि अक्सर वैधानिक अस्वीकरण (डिस्क्लेमर) में कहा जाता है, पिछला प्रदर्शन भविष्य में जारी रह भी सकता है और नहीं भी। मगर एसबीआई म्यूचुअल फंड के तीन दशकों के बहाने से अगर भारतीय म्यूचुअल फंडों के इतिहास की समीक्षा की जाये, तो प्रदर्शन के मामले में इस क्षेत्र ने निवेशकों को निराश नहीं किया है। हाल के वर्षों में निवेशकों ने सीधे इक्विटी में निवेश करने के बदले म्यूचुअल फंडों के रास्ते से इक्विटी में निवेश करने का चलन अपनाया है, जिसका कारण भी यही है।
(निवेश मंथन, जुलाई 2017)

इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश जुलाई में 43 प्रतिशत घटकर 8,898 करोड़ रुपये

नयी दिल्ली, आठ अगस्त (भाषा) बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच इक्विटी म्यूचुअल फंड में जुलाई में 8,898 करोड़ रुपये का निवेश आया है। यह आंकड़ा इससे पिछले महीने की तुलना में 43 प्रतिशत की तेज गिरावट को दर्शाता है।

हालांकि, इन योजनाओं में सकारात्मक प्रवाह का यह लगातार 17वां महीना था।

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में शुद्ध निवेश जून के मुकाबले कम रहा। जून में 15,495 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था। यह आंकड़ा मई में 18,529 करोड़ रुपये और अप्रैल में 15,890 करोड़ रुपये था।

मार्च, 2021 से इक्विटी योजनाओं में शुद्ध निवेश का प्रवाह देखा जा रहा है, जो निवेशकों के बीच सकारात्मक भावना को दर्शाता है।

इससे पहले जुलाई, 2020 से फरवरी, 2021 तक इस तरह की योजनाओं में लगातार आठ महीनों के लिए निकासी देखने को मिली थी। इस दौरान इन योजनाओं से कुल 46,791 करोड़ रुपये निकाले गए थे।

जुलाई में सभी इक्विटी आधारित श्रेणियों को शुद्ध प्रवाह देखने को मिला, जिसमें सबसे अधिक लाभ स्मॉल कैप श्रेणी को मिला। इसमें 1,780 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। इसके बाद फ्लेक्सी कैप फंड में 1,381 करोड़ रुपये आए। लार्ज कैप फंड, लार्ज एंड मिड कैप फंड और मिड कैप में प्रत्येक में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध निवेश देखने को मिला ।

क्या केवल इक्विटी मार्किट में निवेश करना सही वित्तीय निर्णय है?

उपरोक्त प्रश्न- इक्विटी मार्किट में निवेश करना सही वित्तीय निर्णय है ? इसका का स्पष्ट उत्तर – “नहीं” होना चाहिए, केवल इसीलिए क्योंकि किसी अकेले एसेट वर्ग में अपनी पूरी सेविंग निवेशित करना बहुत अधिक जोखिम होगा׀

यह जोखिम भरा है क्योंकि इक्विटी मार्किट उतार- चढाव के अधीन है׀

जबकि ऐतिहासिक रूप से इक्विटी मार्किट ने एक एसेट वर्ग के रूप में अन्य एसेट वर्गों/क्लासों की तुलना में अधिक रिटर्न दिया है, परन्तु हमने यह भी देखा है की लोगों ने इक्विटी मार्किट में बहुत बड़ी रकम गवाई भी है׀

उदाहरण के लिए, 2008-09 के वित्तीय संकट के समय शेयर बाज़ारों में लगभग 50% की गिरावट देखी गयी थी. यदि आपका उस समय कोई लक्ष्य परिपक्व हो रहा था और आपने उस लक्ष्य के लिए इक्विटी मार्किट में निवेश किया था, तो आपने अपनी महत्वपूर्ण पूँजी गवाई होगी׀

एक डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बुरे समय में एक रक्षक की तरह है

तब भी, यदि आपके पास इक्विटी, ऋण, कैश(लिक्विड फण्ड), और गोल्ड का एक डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो है, तो उस पोर्टफोलियो ने लगभग 0.68% एवरेज का रिटर्न दिया होगा׀

ऐसा गोल्ड से मिलने वाले अधिकतम इक्विटी निवेश रिटर्न और ऋण/डेब्ट तथा लिक्विड फण्ड से मिलने वाले स्थिर रिटर्न के कारण हुआ׀

यह परिस्थिति अगले वर्ष बदली, जबकि इक्विटी में 90% की वृद्धि हुई; अन्य एसेट वर्गों ने कम रिटर्न दिया׀

हालांकि, विविध पोर्टफोलियो ने 27% इक्विटी निवेश रिटर्न दिया׀

इक्विटी मार्किट

आप स्वयं को बाज़ार और निवेश उपकरणों के बारे में शिक्षित कर सकते है जिस बाज़ार में आप निवेश कर रहे है ताकि आप किसी भी समय निवेशित रहने के लिए बेहतर निर्णय कर सके׀

डाइवर्सिफिकेशन

डाइवर्सिफिकेशन आपके निवेशों को एक से अधिक एसेट वर्गों में भाग करता है जिससे आपकी पूँजी हानि कम हो सके׀

डाइवर्सिफिकेशन के लिए कोई भी व्यक्ति पीपीएफ, एनएससी, एफडी, सरकारी बॉन्ड, इत्यादि जैसे सुरक्षित निवेश उपकरणों में निवेश करने के बारे में सोच सकता है׀

पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन लाने से हम अपने पोर्टफोलियो से जो रिटर्न चाहते है तथा जो जोखिम हम उठाते है, इनके बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी׀

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हालांकि यहाँ थंब रूल्स है, एसेट एलोकेशन व्यक्तिगत जरूरतों पर आधारित होना चाहिए׀

एसेट एलोकेशन थंब रूल्स

एसेट एलोकेशन थंब रूल्स

1. निवेशक की आयु:

एसेट एलोकेशन का निर्णय करने के लिए आयु एक महत्वपूर्ण कारक है׀

‘100 में से आपकी आयु को घटाना इक्विटी एलोकेशन में उपयोग होने वाला सामान्य थंब रूल है׀

इसका अर्थ है कम आयु के निवेशकों का अधिक इक्विटी एलोकेशन होना चाहिए (उदाहरण के लिए, निवेशक जिनकी आयु 25 व 35 वर्ष है, इनके इक्विटी एलोकेशन क्रमशः 75% व 65% होना चाहिए), जबकि अधिक आयु के लोगों/निवेशकों का इक्विटी एलोकेशन कम होना चाहिए׀

कम उम्र वाले लोगों के पास निवेश करने के लिए अधिक समय होता है और अधिक समय के लिए निवेश करके शेयर मार्केट के उतार – चढ़ाव का सामना करने के बावजूद अधिक रिटर्न के टारगेट को आसानी से पा सकते हैं।

जबकि अधिक आयु के लोगों को रिटायरमेंट के लिए धन की आवश्यकता होती है; इस तरह, एक विशाल राशि को जोखिमपूर्ण उपकरणों में निवेश नहीं किया जा सकता क्योंकि उन्हें अपनी दैनिक जरूरतों के लिए सुरक्षित तथा स्थिर रिटर्न की कामना होती है׀

2. जोखिम लेने की क्षमता:

जोखिम सहन करने की इच्छा ही जोखिम लेने की क्षमता है׀ जोखिमों के बारे में तथा निवेश के प्रकारों के बारे में जानना आवश्यक है׀

इक्विटी बाज़ार बहुत कम समय में तेजी से निचे जा सकता है, लेकिन जैसा की हमने देखा है यह अच्छी तरह से रिकवर भी हो जाता है׀

हालांकि डेब्ट फण्ड कम रिटर्न देते है, लेकिन इनकी स्थिरता की वजह से यह हमारे पोर्टफोलियो में होना आवश्यक है׀

3-6 महीनों के खर्चों के लिए एक आपातकालीन राशि/कोष बनाने के लिए, किसी को लिक्विड फण्ड और एफडी में निवेश करना चाहिए׀ लिक्विड निवेश हमारी आपातकालीन समय में जैसे मेडिकल इमरजेंसी या नौकरी छूट जाने के समय मदद करेगा׀

3. अवधि:

हमारे लक्ष्यों के प्रति हमारे पास कितना समय है यह भी महत्वपूर्ण है׀

आपको यह पता होना चाहिए कि अपने विभिन्न फाइनेंशियल लक्ष्यों के लिए कहाँ और कितना बचत करनी है׀

उदाहरण के लिए- यदि कोई लक्ष्य 3 वर्षो से कम का है, तो इक्विटी निवेश से दूर रहने की सलाह दी जाती है, जब तक आप शेयर बाज़ार के बारे में समुचित रूप से निश्चित नहीं है, क्योंकि कोई भी गिरावट आपके निवेश के मूल्य को नीचे ला सकती है׀

लेकिन, यदि आपके पास 10-15 वर्षों से अधिक की लम्बी अवधि है, तो संभवतः इक्विटी आपको अधिक लाभ देगा׀

4. निवेश उपकरणों की प्रकृति:

जैसे कि इक्विटी के लिए, भले ही यदि हमने 2008-09 के फाइनेंशियल संकट के एक दिन पहले निवेश किया हो या डॉट-कॉम बस्ट या किसी बड़े संकट में निवेश किया हो- हमारा निवेश पहले 50% तक गिर गया, तथा अगले 10 वर्षों में भी, यह अभी भी हमारे पैसे तीन गुना किये है׀

यदि हम बाज़ार गिरने के बाद घबराकर ऑप्ट-आउट या ट्रेड करना छोड़ देते हैं, तो हम इस तरह के लाभ को खो सकते है।

2008-09 के जैसे मुश्किल समय में एफडी, लिक्विड इन्वेस्टमेंट और गोल्ड ही हमें ट्रेड करने में फाइनेंशियल सपोर्ट करेगा।

यदि आप शेयर बाज़ार के बारे में प्रैक्टिकल नॉलेज चाहते है, तो आप हमारा स्टॉकएज़ एप डाउनलोड कर सकते है׀

हैप्पी लर्निंग!

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अप्रैल में इक्विटी म्यूचुअल फंड में हुआ 15,890 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश, लगातार 14वें महीने बढ़त दर्ज

डेट सेग्मेंट में पिछले महीने शुद्ध रूप से 69,883 करोड़ रुपये का इक्विटी निवेश निवेश आया, जबकि मार्च में इसमें से 1.5 लाख करोड़ रुपये निकाले गये थे. इसके अलावा सोने में इस दौरान 1,100 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया.

अप्रैल में इक्विटी म्यूचुअल फंड में हुआ 15,890 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश, लगातार 14वें महीने बढ़त दर्ज

TV9 Bharatvarsh | Edited By: सौरभ शर्मा

Updated on: May 10, 2022 | 10:30 PM

घरेलू शेयर बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली के बीच अप्रैल में इक्विटी म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में 15,890 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ है. यह लगातार 14वां महीना है जब शुद्ध प्रवाह बढ़ा है. उद्योग निकाय एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) ने मंगलवार कहा कि अप्रैल का यह आंकड़ा मार्च में इक्विटी म्यूचुअल फंड में हुए 28,463 करोड़ रुपये के शुद्ध निवेश की तुलना में कम है. इक्विटी यानी शेयर (Stocks) में निवेश से जुड़ी योजनाओं में शुद्ध रूप से निवेश मार्च, 2021 से ही बढ़ रहा है. यह इक्विटी निवेश निवेशकों के बीच ऐसी योजनाओं को लेकर सकारात्मक धारणा को बताता है. इससे पहले इन योजनाओं से जुलाई 2020 से लेकर फरवरी 2021 के दौरान लगातार राशि निकाली गई थी.

एसआईपी के जरिए निवेश घटा

वहीं, मासिक निवेश योजना (एसआईपी) में निवेश अप्रैल, 2022 के दौरान घटकर 11,863 करोड़ रुपये रहा, जो मार्च में 12,328 करोड़ रुपये था. हालांकि समीक्षाहीन माह में एसआईपी खातों की संख्या अब तक के सर्वकालिक स्तर 5.39 करोड़ पर पहुंच गई. अप्रैल में एसआईपी के 11.29 लाख नए खाते खोले गए. आंकड़ों के अनुसार, डेट सेग्मेंट में पिछले महीने शुद्ध रूप से 69,883 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि मार्च में इसमें से 1.5 लाख करोड़ रुपये निकाले गये थे. इसके अलावा सोने में इस दौरान 1,100 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया. कुल मिलाकर, म्यूचुअल फंड उद्योग में अप्रैल माह के दौरान 72,846 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ, जबकि इससे पिछले महीने 69,883 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी

एफपीआई का निवेश निकालना जारी

हालांकि दूसरी तरफ विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का भारतीय बाजारों से निकासी का सिलसिला अप्रैल में लगातार सातवें महीने जारी रहा. अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा आक्रामक तरीके से ब्याज दरों में वृद्धि की आशंका के बीच एफपीआई ने अप्रैल में भारतीय शेयर बाजारों से 17,144 करोड़ रुपये निकाले हैं. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक सात महीनों यानी अप्रैल तक शुद्ध बिकवाल रहे हैं और उन्होंने शेयरों से 1.65 लाख करोड़ रुपये की भारी राशि निकाली है। इसकी प्रमुख वजह अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक तरीके से वृद्धि की आशंका और यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पैदा हुआ भू-राजनीतिक संकट है. लगातार छह महीने की बिकवाली के बाद अप्रैल के पहले सप्ताह में एफपीआई शुद्ध लिवाल रहे थे और उन्होंने 7,707 करोड़ रुपये का निवेश किया था. डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में एफपीआई ने भारतीय बाजारों से 17,144 करोड़ रुपये निकाले हैं. हालांकि, यह मार्च के 41,123 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी के आंकड़े से कम है.

निवेश उत्‍पाद

बैंक ऑफ बड़ौदा पहली बार एवं अनुभवी निवेशकों की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए म्यूचुअल फंड, पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं (पीएमएस), बांड, एनसीडी, वैकल्पिक निवेश उत्पादों आदि की विस्तृत श्रृंखला पेश करता है.

म्यूचुअल फंड निवेश

  • म्युचुअल फंड दीर्घावधि में मुद्रास्फीति से निपटने एवं कर-बचत प्रतिफल (रिटर्न) प्रदान करते हैं .
  • निवेशक अपने जोखिम / रिटर्न प्रोफाइल के अनुसार विभिन्न आस्ति वर्गों जैसे इक्विटी, ऋण या सोने में निवेश कर सकते हैं.

वैकल्पिक निवेश उत्‍पाद

  • वैकल्पिक निवेश उत्पादों का उपयोग करके पेशेवर प्रबंधित और विविध प्रकार की निवेश नीतियों की सुविधा प्राप्त करें.
  • वैकल्पिक निवेश उत्पाद में पोर्टफोलियो प्रबंधित सेवा, संरचित उत्पाद आदि शामिल हैं.

बड़ौदा ई-ट्रेड 3 इन 1 खाता

  • बाधा रहित और सुरक्षित ट्रेडिंग अनुभव प्राप्‍त करने के लिए बैंक ऑफ़ बड़ौदा के साथ एक सिंक्रोनाइज़ बैंक, डीमैट और ट्रेडिंग खाता खोलें .
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

म्यूचुअल फंड निवेशकों को यूनिट जारी करके और इक्विटी निवेश प्रस्ताव दस्तावेज में बताए गए उद्देश्यों के अनुसार प्रतिभूतियों में फंड का निवेश करके धन जमा करने का एक साधन है.

प्रतिभूतियों में निवेश उद्योगों और क्षेत्रों के व्यापक क्रॉस-सेक्शन में फैला हुआ है और इस प्रकार इसमें अनेक प्रकार की जोखिम है क्योंकि सभी स्टॉक एक ही तरह से और एक ही समय में सामान अनुपात में नहीं चल सकते हैं. म्यूचुअल फंड द्वारा निवेशकों को उनके द्वारा निवेश किए गए धन की मात्रा के अनुसार इकाइयाँ जारी किया जाता है. म्यूचुअल फंड के निवेशकों को यूनिटहोल्डर के रूप में जाना जाता है.

इसके अंतर्गत लाभ या हानि निवेशकों द्वारा उनके निवेश के अनुपात में शेयर की जाती है. म्यूचुअल फंड आम तौर पर कई योजनाएं लेकर आते हैं जो समय-समय पर विभिन्न निवेश उद्देश्यों के साथ शुरू की जाती हैं.

म्यूचुअल फंड की किसी विशेष योजना का कार्यनिष्पादन इसके नेट आस्ति मूल्य (एनएवी) द्वारा दर्शाया जाता है.

म्यूचुअल फंड निवेशकों से जुटाए गए रकम को प्रतिभूति बाजार में निवेश करते हैं. सरल शब्दों में, एनएवी योजना द्वारा धारित प्रतिभूतियों का बाजार मूल्य होता है. चूंकि प्रतिभूतियों का बाजार मूल्य प्रत्येक दिन बदलता है, इसलिए किसी योजना का एनएवी भी दैनिक आधार पर बदलता रहता है. प्रति इकाई एनएवी किसी विशेष तिथि पर योजना की कुल इकाइयों की संख्या से विभाजित करके इसकी प्रतिभूतियों का बाजार मूल्य होता है. उदाहरण के लिए, यदि म्यूचुअल फंड योजना की प्रतिभूतियों का बाजार मूल्य रू. 200 लाख है और म्यूचुअल फंड ने निवेशकों को 10 रुपये की 10 लाख इकाइयां जारी की हैं, तो फंड की प्रति यूनिट एनएवी 20 रुपये (यानी, 200) होगी. म्यूचुअल फंड द्वारा दैनिक आधार पर एनएवी का खुलासा करना आवश्यक होता है.

  • परिपक्वता अवधि के अनुसार योजनाएं:

किसी म्यूचुअल फंड योजना को उसकी परिपक्वता अवधि के आधार पर ओपन-एंडेड योजना या क्लोज-एंडेड योजना क्र रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है.

ओपन-एंडेड फंड / योजना

एक ओपन-एंडेड फंड या योजना वह है जो निरंतर आधार पर सदस्यता और पुनर्खरीद के लिए उपलब्ध होता है. इन योजनाओं की कोई निश्चित परिपक्वता अवधि नहीं होती है. निवेशक आसानी से प्रति यूनिट नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) पर यूनिट खरीद और बेच सकते हैं जिसे दैनिक आधार पर घोषित किया जाता है. ओपन-एंड योजनाओं की प्रमुख विशेषता तरलता(लिक्वीडीटी है

क्लोज-एंडेड फंड / योजना

क्लोज-एंडेड फंड या स्कीम के अंतर्गत एक निर्धारित परिपक्वता अवधि होती है, जैसे, 3-5 साल. योजना के शुभारंभ के समय एक निर्दिष्ट अवधि के दौरान ही फंड सदस्यता के लिए खुला रहता है. निवेशक नए फंड की पेशकश के समय इस योजना में निवेश कर सकते हैं और बाद में वे स्टॉक एक्सचेंजों पर योजना की इकाइयों की खरीद या बिक्री कर सकते हैं जहां इकाइयां सूचीबद्ध हैं. निवेशकों को एक एक्जिट मार्ग प्रदान करने के लिए, कुछ क्लोज-एंडेड फंड एनएवी से संबंधित कीमतों पर आवधिक पुनर्खरीद के माध्यम से यूनिट को म्यूचुअल फंड को फिर से बेचने का विकल्प देते हैं.

किसी योजना को उसके निवेश के उद्देश्य पर विचार करते हुए विकास योजना, आय योजना या संतुलित योजना के रूप में भी वर्गीकृत किया जा सकता है. इस तरह इक्विटी निवेश की योजनाएं ओपन-एंडेड या क्लोज-एंडेड कोई भी हो सकती हैं जैसा कि इससे पूर्व सूचित किया है. ऐसी योजनाओं को मुख्य रूप से निम्नानुसार वर्गीकृत किया जा सकता है:

विकास/इक्विटी उन्मुख योजना

ग्रोथ फंड का उद्देश्य मध्यम से लंबी अवधि में पूंजी वृद्धि प्रदान करना है. ऐसी योजनाएं आम तौर पर अपनी निधि का का एक बड़ा हिस्सा इक्विटी में निवेश करती हैं. ऐसे फंडों में तुलनात्मक रूप से उच्च जोखिम निहित होता है. ये योजनाएं निवेशकों को लाभांश विकल्प एवं विकास जैसे विभिन्न विकल्प प्रदान करती हैं और निवेशक अपनी पसंद के आधार पर किसी विकल्प का चयन कर सकते हैं. निवेशकों द्वारा अपने आवेदन पत्र में ऐसे विकल्प का उल्लेख करना चाहिए. म्यूचुअल फंड अपने निवेशकों को इसकी तारीख के बाद भी अपना विकल्प बदलने की अनुमति भी प्रदान करते हैं.. दीर्घावधि के दृष्टिकोण वाले निवेशकों के लिए ऐसी विकास योजनाएं अच्छी होती हैं, जो समय की अवधि में इसमें बढ़ोत्तरी चाहते हैं.

आय/ऋण उन्मुख योजना

आय फंड का उद्देश्य निवेशकों को नियमित और निश्चित आय प्रदान करना है. ऐसी योजनाएं आम तौर पर निश्चित आय प्रतिभूतियों जैसे बांड, कॉर्पोरेट डिबेंचर, सरकारी प्रतिभूतियों और मुद्रा बाजार के साधनों में अपना निवेश करती हैं और ऐसे फंड इक्विटी योजनाओं की तुलना में कम जोखिम वाले होते हैं.

हालांकि, ऐसे फंड्स में कैपिटल एप्रिसिएशन के अवसर भी सीमित होते हैं. देश में ब्याज दरों में होने वाले बदलाव के कारण ऐसे फंडों की एनएवी प्रभावित होती है. ब्याज दरें कम होने पर ऐसे फंडों के एनएवी में अल्पावधि में वृद्धि होने की संभावना रहती है और ब्याज दर में वृद्धि होने पर इसके विपरीत प्रभाव पड़ता है. तथापि दीर्घावधि के निवेशक इन उतार-चढ़ावों से परेशान नहीं हो सकते हैं.

संतुलित योजनाओं का उद्देश्य विकास और नियमित आय दोनों ही प्रदान करना है क्योंकि ऐसी योजनाएं इक्विटी और निश्चित आय प्रतिभूतियों दोनों में इनके प्रस्ताव दस्तावेजों में दर्शाए अनुपात में निवेश करती हैं. ये मध्यम वृद्धि की तलाश कर रहे निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं. शेयर बाजारों में शेयर की कीमतों में उतार चढ़ाव होने के कारण भी ये फंड प्रभावित होते हैं. हालांकि, ऐसे फंडों के एनएवी के शुद्ध इक्विटी फंड की तुलना में अस्थिर होने की संभावना कम होती है.

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