शुरुआती लोगों के लिए अवसर

भारी उलटफेर पैटर्न

भारी उलटफेर पैटर्न
Navin Fluorine International के शेयर में आज शानदार तेजी आई।

SSC जीडी कांस्टेबल भर्ती का परीक्षा पैटर्न बदला, भारी पड़ेगा तुक्का लगाना, जानें नोटिफिकेशन की 10 खास बातें

SSC GD Constable Notification: इस बार जीडी कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा पहले से अलग होगी। पहले जहां डेढ़ घंटे का पेपर होता था, अब पेपर एक घंटे का हुआ करेगा। अब 100 की बजाय 80 प्रश्न ही पूछे जाएंगे

SSC जीडी कांस्टेबल भर्ती का परीक्षा पैटर्न बदला, भारी पड़ेगा तुक्का लगाना, जानें नोटिफिकेशन की 10 खास बातें

SSC GD Constable Recruitment 2022 : कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) ने जीडी कांस्टेबल भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस बार कांस्टेबल के कुल 24,396 पदों पर वैकेंसी निकाली गई है। इनमें पुरुष कांस्टेबल के 21579 और महिला कांस्टेबल के 2626 पद हैं। इच्छुक व योग्य उम्मीदवार ssc.nic.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 30 नवंबर 2022 है। ऑनलाइन फीस जमा कराने की अंतिम तिथि 1 दिसंबर है। योग्य व इच्छुक उम्मीदवार ssc.nic.in व ssconline.nic पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

इस बार जीडी कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा पहले से अलग होगी। पहले जहां डेढ़ घंटे का पेपर होता था, अब पेपर एक घंटे भारी उलटफेर पैटर्न का हुआ करेगा। अब पेपर में 100 की बजाय 80 प्रश्न ही पूछे जाएंगे। नेगेटिव मार्किंग पहले की तरह होगी लेकिन पहले जहां गलत उत्तर के लिए चौथाई अंक कटता था अब आधा अंक कटा करेगा।

यहां जानें भर्ती से जुड़ी 10 खास बातें
1. शैक्षणिक योग्यता योग्यता - 10वीं पास।

2. आयु सीमा - 18 वर्ष से 23 वर्ष । आयु की गणना 1 जनवरी 2023 से की जाएगी। यानी वही उम्मीदवरा आवदेन कर सकते हैं जिनका जन्म 2 जनवरी 2000 से पहले और 1 जनवरी 2005 के बाद न हुआ हो। एससी, एसटी वर्ग को अधिकतम आयु सीमा में पांच वर्ष और ओबीसी को तीन वर्ष की छूट मिलेगी।

3. शारीरिक योग्यता संबंधी नियम
लंबाई

पुरुष उम्मीदवार - 170 सेमी.
महिला उम्मीदवार - 157 सेमी.
सीना- पुरुष उम्मीदवार - 80 सेमी. (फुलाकर - 85 सेमी

4. वेतनमान -
एनसीबी में सिपाही के लिए पे लेवल -1 (18000-56000 रुपये)
अन्य सभी पदों के लिए - पे लेवल - 3 (21,700-69,100 रुपये)

5. वैकेंसी डिटेल
बीएसएफ में 10497, सीआईएसएफ में 100, सीआरपीएफ में 8911, एसएसबी में 1284, आईटीबीपी में 1613, एआर में 1697 और एसएसएफ में 103 वैकेंसी है। सीआरपीएफ और एनआईए में कोई वैकेंसी नहीं है।

6. चयन - सबसे पहले लिखित परीक्षा (कंप्यूटर बेस्ड) होगी। इसमें सफल उम्मीदवारों को शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) और शारीरिक मापतौल परीक्षा (पीएसटी) के बुलाया जाएगा। पीईटी CAPF कराएगी।

7. लिखित परीक्षा में जनरल इंटेलिजेंस व रीजनिंग, जनरल नॉलेज व जनरल अवेयरनेस, इलिमेंट्री मैथ्स व इंग्लिश/हिन्दी विषय से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे। चारों सेक्शन से 20-20 प्रश्न पूछे जाएंगे। सभी सेक्शन 40-40 मार्क्स के होंगे। पेपर की अवधि 60 मिनट होगी। प्रत्येक गलत उत्तर के लिए आधा अंक काटा जाएगा।

शारीरिक दक्षता परीक्षा
पुरुष उम्मीदवारों को 24 मिनट में 5 किमी की दौड़ लगानी होगी। इसके अलावा साढ़े 6 मिनट में 1.6 किमी की दौड़ भी लगानी होगी।
महिला उम्मीदवारों को 4 मिनट में 800 मीटर की दौड़ लगानी होगी। इसके अलावा साढ़े 8 मिनट में 1.6 किमी की दौड़ भी लगानी होगी।

8. फाइनल मेरिट
जो पीईटी पीएसटी में पास होंगे, उनकी लिखित परीक्षा में प्राप्ताकों के आधार पर फाइनल मेरिट लिस्ट बनेगी।

9. महत्वपूर्ण तिथियां
आवेदन प्रक्रिया शुरू होने की तिथि - 27 अक्टूबर
ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि - 30 नवंबर (रात 11 बजे)
ऑनलाइन फीस जमा कराने की अंतिम तिथि - 1 दिसंबर (रात 11 बजे)
चालान जनरेट करने की अंतिम तिथि - 30 नवंबर (रात 11 बजे)
चालान के जरिए फीस जमा कराने की अंतिम तिथि - 1 दिसंबर 2022
टियर - 1 परीक्षा (सीबीटी) की तिथि - जनवरी 2023

10. आवेदन फीस
अनारक्षित उम्मीदवारों को 100 रुपये की एग्जामिनेशन फीस देनी होगी। महिला उम्मीदवारों व एससी, एसटी उम्मीदवारों को इस फीस से छूट है। फीस एसबीआई चालान/एसबीआई नेट बैंकिंग या मास्टर कार्ड, क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड के जरिए जमा कराई जा सकती है।

अनियमित नींद से कैंसर का ख़तरा !

नींद और कैंसर

' करंट बायोलॉजी' में प्रकाशित इस शोध रिपोर्ट से इस विचार को बल मिला है कि शिफ़्ट में काम करने वालों की सेहत पर अनियमित नींद का ख़राब असर पड़ता है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन महिलाओं के परिवार में स्तन कैंसर होेने का ख़तरा है उन्हें शिफ़्ट में कभी काम नहीं करना चाहिए.

हालांकि रिपोर्ट में इसके लिए लोगों पर टेस्ट किए जाने की ज़रूरत बताई गई है.

वज़न बढ़ने का ख़तरा भी

इमेज स्रोत, BBC World Service

आंकड़ों से ये भी पता चला कि जिन चूहों का नींद का पैटर्न अनियमित था वे सामान्य खाना खाने के बावजूद 20 फीसदी ज़्यादा भारी थे.

अध्ययनों से अक्सर ये संकेत मिले हैं कि शिफ्ट में काम करने वालों और फ्लाइट अटेंडेंट्स में स्तन कैंसर का ज्यादा ख़तरा होता है.

इस बारे में एक तर्क यह है कि शरीर की अंदरूनी लय या बॉडी क्लॉक को अस्त-व्यस्त करने से इस बीमारी का ख़तरा बढ़ जाता है.

बहरहाल, कैंसर और नींद का ये संबंध अनिश्चित है, क्योंकि हो सकता है कि जो लोग शिफ्ट में काम करते हैं उनका सामाजिक वर्ग, गतिविधियों का स्तर अलग होता हो या उनको मिलने वाली विटमिन डी की मात्रा अलग होती हो.

बॉडी क्लॉक

इमेज स्रोत, Thinkstock

जिन चूहों में स्तन कैंसर होेने का ख़तरा था, उनकी बॉडी क्लॉक एक साल तक हर हफ़्ते बारह घंटे पीछे हुई थी.

सामान्य तौर पर पचास हफ्तों में उन्हें ट्यूमर होते थे लेकिन उनकी नींद में जब लगातार बाधा डाली गई तो ट्यूमर आठ हफ्ते पहले ही उभर आए.

ब्रिटेन की मेडिकल रिसर्च काउंसिल के डॉक्टर माइकल हेस्टिंग्स ने बीबीसी को बताया, "मैं मानता हूं कि चूहों के मॉडल में किया गया यह अध्ययन प्रयोग पर आधारित एक स्पष्ट सबूत है कि बॉडी क्लॉक में बाधा डालने से स्तन कैंसर अपेक्षाकृत तेज़ी से विकसित होता है."

वह कहते हैं कि लोगों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, "अपने वज़न का ख्याल रखें, स्तनो की जांच पर ध्यान दें और नियोक्ता कार्यस्थल पर ही हेल्थ चेकअप करवाएं."

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Trending stock: शेयर बाजार में भारी गिरावट के बावजूद 1.5 फीसदी उछला यह शेयर, यहां जानिए डिटेल

नवीन फ्लोरीन इंटरनेशनल (Navin Fluorine International) के शेयरों में आज शुरुआती कारोबार में 1.5 फीसदी तेजी आई। कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण आज शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ खुला। लेकिन लोअर लेवल पर नवीन फ्लोरीन इंटरनेशनल के शेयरों में लिवाली को लेकर भारी उत्साह दिखा। यह अपने दिन के न्यूनतम स्तर 3587.35 रुपये से करीब सात फीसदी चढ़ा। यह करेक्शन मोड में चल रहा था और अपने पिछले स्विंग हाई 4171.95 रुपये से 10 फीसदी नीचे आ चुका है।

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हिमाचल की वो सीटें जो हर बार बदलती हैं मिजाज, कायम रहता है प्रदेश का 'रिवाज'

हिमाचल प्रदेश की सियासत भारी उलटफेर पैटर्न में साढ़े तीन दशक से हर पांच साल पर सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड देखने को मिल रहा है. राज्य की महज 23 विधानसभा सीटें है, जहां पर पांच साल के बाद विधायक बदल जाते हैं. इसके चलते सत्ता परिवर्तन का मिजाज बना हुआ है. इसके अलावा कांग्रेस और बीजेपी के बीच चार से आठ फीसदी वोटों के अंतर से सारी समीकरण बदल जाते हैं.

जयराम ठाकुर और प्रतिभा सिंह

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली ,
  • 08 नवंबर 2022,
  • (अपडेटेड 08 नवंबर 2022, 2:16 PM IST)

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में महज चार दिन बाकी है और प्रचार अभियान थमने में सिर्फ दो दिन रह गए हैं. कांग्रेस और बीजेपी ने अपनी-अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है. सूबे में पिछले साढ़े तीन दशकों से हर पांच साल में सत्ता बदलने का ट्रेंड चला आ रहा है. बीजेपी सत्ता परिवर्तन के सिलसिले को तोड़ने की कवायद में है तो कांग्रेस इस ट्रेंड को बरकरार रखना चाहती है. हालांकि, यह ट्रेंड पूरे हिमाचल का नहीं है बल्कि 23 सीटें है, जिनका हर चुनाव में 'मिजाज' बदल जाता है और सत्ता परिवर्तन का 'रिवाज' बन गया है.

हिमाचल में 2003 से लेकर 2017 तक हुए चार विधानसभा चुनाव के वोटिंग पैटर्न को देखें तो राज्य में चार से आठ फीसदी के वोटों के अंतर से सरकारें बनती और बिगड़ती रही हैं. प्रदेश में जब-जब वोटिंग पैटर्न में इजाफा हुआ है तो सियासी दलों की सीटों में भी बढ़ा अंतर दिखा है. ऐसे में देखना है कि इस बार वोटिंग ट्रेंड किस तरह से रहता है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश एक छोटा राज्य हैं, जहां पर कुछ वोटों के इधर से उधर होने पर सारे समीकरण बदल जाते हैं?

हिमाचल में 68 विधानसभा सीटों वाला भले ही छोटा राज्य हो, लेकिन यहां चुनावी पंडितों के लिए भविष्यवाणी करना कोई आसान काम नहीं है. प्रदेश की अधिकांश विधानसभा सीटों पर 90 हजार से कम वोटर हैं जबकि लाहौल और स्पीति जैसी कुछ सीटों पर 30 हजार से भी कम मतदाता हैं. ऐसे में चुनाव में जीत-हार का मार्जिन भी कम होता है. ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी सत्ता पर काबिज होने के लिए चार से सात फीसदी वोटों के अंतर से बढ़त बनाने के लिए लड़ाई लड़ रही हैं.

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4 से 7 फीसदी वोटों के अंतर का खेल

साल 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 41 फीसदी वोटों के साथ 43 सीटें जीतने में कामयाब रही जबकि बीजेपी को 35.38 फीसदी वोटों के साथ 16 सीटें मिली थी. सात फीसदी वोटों के अंतर ने कांग्रेस की 27 सीटें बढ़ा दी थी. इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनाव के नतीजे देखें तो बीजेपी 43.78 फीसदी वोटों के साथ 41 सीटें और कांग्रेस 38.90 फीसदी वोटों के साथ 23 सीटें जीती थी. इस चुनाव में 4.88 फीसदी वोटों के अंतर ने 18 सीटें बीजेपी की बढ़ा दी थी.

2012 के विधानसभा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 42.81 फीसदी वोटों के साथ 36 सीटें जीती तो बीजेपी को 38.47 फीसदी वोटों के साथ 26 सीटें मिली थी. इस तरह से करीब चार फीसदी वोटों के अंतर ने बीजेपी की 10 सीटें बढ़ा दी थी. इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव नतीजे को देखें तो बीजेपी 48.79 फीसदी वोटों के साथ 44 सीटें जीती जबकि कांग्रेस ने 41.68 फीसदी वोटों के साथ 21 सीटे जीतने में कामयाब रही. इस तरह सात फीसदी वोटों के अंतर के चलते बीजेपी को कांग्रेस से 23 सीटें ज्यादा मिली थी.

कांग्रेस-बीजेपी किन सीटों पर मजबूत

हिमाचल में अगर सत्ताधारी पार्टियों (सरकारों) को वोट देने के इतिहास और ट्रेंड को देखते है तो लगता है कि बीजेपी को इस बार चुनाव में कांग्रेस से हार मिल सकती है. हालांकि, आंकड़े और सियासी समीकरण को देखें तो इस बार चुनाव में बीजेपी अपनी सत्ता को बचाए रखने में सफल रह सकती है, लेकिन 21 सीटों पर उसके बागी उसकी राह में रोड़ा बन गए हैं.

हिमाचल में पिछले दो विधानसभा चुनावों के आंकड़ों के आधार पर देखें तो कांग्रेस की तुलना में बीजेपी के पास कहीं ज्यादा मजबूत सीटें हैं. हिमाचल की 18 सीटे ऐसी हैं जिन पर बीजेपी ने पिछले चुनावों से अपना कब्जा बरकरार रख रहा है जबकि कांग्रेस 12 सीटों पर अपना वर्चस्व कायम रखा है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं 18 सीटों पर बीजेपी ही या 12 सीटों पर कांग्रेस ही जीत दर्ज करेगी. इनमें से कई सीटों पर जीत हार का मार्जिन बहुत बड़ा नहीं है, ऐसे में इन सीटों पर उलटफेर भी हो सकता है.

हिमाचल की 23 सीटों पर बदलता मिजाज

हिमाचल प्रदेश की कुल 68 में से 23 सीटें ऐसी हैं, जिन्होंने सही मायने में एक ट्रेंड सेट किया है. 2012 में कांग्रेस ने जीती थी तो 2017 में बीजेपी ने कब्जा जमाया था. इससे यह पता चलता है कि हर पांच साल पर इन 23 सीटों के वोटर अपना सियासी मिजाज बदल देते हैं. 1985 के बाद से किसी पार्टी को लगातार दो बार सरकार चलाने का मौका नहीं मिला है. भाजपा और कांग्रेस को ही हरपांच साल पर शासन करने का मौका मिलता रहा है. ऐसे में इन 23 सीटों पर जीत की उम्मीद कांग्रेस लगाए हुए है. हिमाचल की हर सीट पर पांच साल में विधायक बदल जाते हैं, जिनमें ज्यादातर एससी और एसटी समुदाव वाली सुरक्षित सीटें है. लाहौल, स्पीति, भरमौर, बैजनाथ जैसी सीटें शामिल हैं.

किस जिले में किसका पलड़ा भारी रहा

हिमाचल के 12 में से आठ जिलों में बीजेपी 2017 में कांग्रेस के मुकाबले ज्यादा सीटें मिलीं थीं. वहीं, चार जिलों में कांग्रेस को बीजेपी से ज्यादा सीटें मिली थी. बीजेपी को कांगड़ा, मंडी, बिलासपुर, चंबा, कुल्लू, सिरमौर, लाहौल स्पीती और ऊना में बढ़त मिली थी. वहीं, कांग्रेस को हमीरपुर, किन्नौर, शिमला और सोलन जिले में बीजेपी से ज्यादा सीटें आई थी. हिमाचल के कांगड़ा में सबसे ज्यादा 15 सीटे तो मंडी में 10 और शिमला में आठ सीटें हैं. इन तीनों बड़े जिलों में से कांगड़ा और मंडी में बीजेपी को एक तरफा जीत मिली थी जबकि शिमला में कांग्रेस आगे रही थी. इन तीन ही जिलों के सियासी समीकरण हिमाचल की सत्ता का रुख तय करते हैं?

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जयपुर, झालावाड़। राजस्थान में तीन संभागों भारी उलटफेर पैटर्न में बुधवार और गुरुवार को भी जोरदार बारिश का दौर जारी रहेगा। मौसम विभाग ने राजस्थान के तीन संभागों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
मौसम विभाग से मिली ताजा जानकारी के अनुसार आगामी 48 घण्टे अजमेर, जोधपुर और उदयपुर संभाग के कुछ क्षेत्रों में भारी से अति भारी बारिश हो सकती है। इसके बारे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। उधर कोटा संभाग में लगाातर बारिश का दौर जारी है। बुधवार सुबह झालावाड़, कोटा समेत संभाग में मौसम साफ था, लेकिन बादल छाए हुए थे। कोटा में मंगलवार दोपहर करीब दो बजे जोरदार बारिश हुई। इससे कोटा बैराज में जोरदार पानी की आवक हुई। इसके चलते गेट खेालकर पानी की निकासी की गई। उधर मध्यप्रदेश में तेज बारिश का दौर जारी है। इससे कालीसिंध बांध में लगातार पानी की आवक हो रही है। बांध के गेट खोलकर लगाातार पानी की निकासी की जा रही है। झालावाड़ शहर के तीनों तालाबों पर बुधवार को भी चादर चल रही है। पार्वती नदी उफान पर आने से आवागमन बाधित हो रहा है।
बदलेगा मानसून का पैटर्न
मौसम विभाग के अनुसार 28 से 29 जुलाई को मानसून का पैटर्न बदलेगा और मानसूनी गतिविधियां उत्तरी राजस्थान की ओर से शिफ्ट होने की संभावना है।

राजस्थान के मारवाड़.गोडवाड़ के पाली शहर सहित जिले भर में बारिश का दौर जारी है। सोमवार रात से शुरू हुई बारिश से चारों ओर पानी.पानी हो गया। पाली जिले के रानी में सवा तीन, बाली व सुमेरपुर में दो.दो इंच, सोजत में डेढ़ व मारवाड़ जंक्शन में सवा इंच बारिश हुई। पाली शहर में पौन इंच बारिश हुई। पाली शहर में दिनभर रिमझिम बारिश का दौर रहा। जिले के सबसे बड़े जवाई बांध में क्षमता से एक तिहाई पानी आ गया।

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